रविवार, मई 04, 2008

नरगिसी आँखें, गुलाबी गाल

इस साल इतनी फ़ूलों की तस्वीरें खींचीं जितनी पहले सारे जीवन में नहीं खींचीं थीं. इस साल एक फ़ूल पर ज़ूम करके फोकस करना और पीछे बैकग्राउँड को धुँधला करके फोटो खींचना पहली बार किया और यह तस्वीरें मुझे बहुत अच्छी लगती हैं इसलिए जब भी बाहर कोई फ़ूल देखता हूँ, तुरंत कैमरा बाहर निकल आता है.

फ़ूलों की अधिक तस्वीरें खींचने की वजह से ही शायद बार बार मन में फ़ूलों से जुड़ी बातें आती हैं, जैसे कुछ दिन पहले मैंने "फ़ुल गेंदवा न मारो" शीर्षक का संदेश लिखा था.

आज सुबह भी अपने कुत्ते के साथ सैर को निकला तो सुंदर टाईगर लिली के फ़ूलों को देख कर रुक गया. मेरे कुत्ते ब्राँदो को मेरा बार बार बिना वजह रुकना और तस्वीर खींचना अच्छा नहीं लगता, अधिकतर जब कैमरा क्लिक करने लगता हूँ तो झटका लगा कर हिला देता है, या फ़िर कभी फ़ूल के पीछे से आ कर तस्वीर बिगाड़ देता है. बहुत गुस्सा आये तो अँगद जी बन कर पाँव जमा देता है और आगे चलने का नाम नहीं लेता.



खैर टाईगर लिली की तस्वीर खींच रहा था तो मन में फ़ूलो से दी जाने वाली उपमाओं की बात आयी. गुलाबी गालों की उपमा शायद सबसे अधिक प्रचलित है. हिंदी, अँग्रेजी, इतालवी, फ्राँसिसी, सब भाषों में इस उपमा को सुना है. अनारकली की उपमा के बारे में मुगलेआज़म जैसी फ़िल्मों से मालूम है हालाँकि अनार की कलियाँ मुझे विषेश सुंदर नहीं दिखती.

कीचड़ में उगने वाले कमल की उपमा तो समझ में आती है पर कमल जैसे चरणों की उपमा नहीं समझ पाता, क्या अर्थ हुआ इसका? अँग्रेजी में वाटर लिली का नज़ाकत की उपमा देने के लिए प्रयोग होता है.

नरगिसी आँखों की उपमा भी सुनी है पर नरगिस के फ़ूल तो सफ़ेद रंग के होते हैं, सफ़ेद आँखों की भला यह कैसी उपमा हुई यह समझ नहीं आया? अँग्रेज़ी में वायलेट के जामुनी फ़ूलों जैसी आँखों की उपमा मुझे एलिज़ाबेथ टेलर को देख कर समझ में आयी थी.

एक फ़िल्म याद है जिसमें अभिनेता मारूती टुनटुन को "मेरा गोभी का फ़ूल" कह कर बुलाते थे. सुना है जापान में चैरी के फ़ूलों की उपमा दी जाती है श्वेत गोरे चेहरे को.

और कौन सी फ़ूलों की उपमा दी जाती है, भारत के विभिन्न भागों में?

और फ़ूलों की बात हुई तो प्रस्तुत हैं इस वर्ष की खींची मेरी तस्वीरों में कुछ गुलाब की कलियों की तस्वीरें.


















9 टिप्‍पणियां:

  1. सुशील कुमार4 मई 2008 को 3:39 pm

    कितने सुन्दर फूल, दिल खुश।

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  2. गूलर के फूल कम दिखायी देते हैं ,ऐसी मान्यता है ।इसलिए भोजपुरी में एक अत्यन्त लोकप्रिय लोकगीत हुआ जिसे चाँदपुतली ने गाया था :
    " गुलरी के फुलवा , बलम हाय ! तुम तो हुई गए"

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  3. वाह !!
    ...इतनी ,सुँदर, सुँदर, कलियोँ की तस्वीरेँ देख कर,
    मन प्रसन्न हो गया !!
    -- लावण्या

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  4. कमल के जैसे पैरोँ के तलुवे भगवान के इसीलिये कहे जाते हैँ कि वे स्वास्थ्य से भरपूर हैँ ..
    [ healthy Feet & hands are lways reddish in complexion ]
    और,
    अनार की कली खिजाँ मेँ भी खिली रहती है, जैसा इस गाने मेँ भी है ,
    "खिजाँ मेँ भी खिली रही ये कली अनार की " जिससे भी nature की विपरित अवस्था मेँ, जीवन सँजोने की शक्ति देखकर इन्साँ, अनारकली की तारीफ करता है -
    [ the same way Evergreen trees like are Pine are looked upon in the dead of winter snow ]

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  5. मुझे शक है कहीं आप डॉक्‍टर की बजाय फोटोग्राफर तो नहीं.....

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  6. कमल की तो कितनी ही उपमायें दी जाती हैं
    कमलनयन
    कमलवदन
    कमलमुख
    चरणकमल
    हस्तकमल

    शायद सब कमल की कोमलता के कारण।

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  7. भूवनेश भाई...ये डॉ. नहीं होते तो जानेमाने फोटोग्राफर ही होते...अपने को कोई शक नहीं :)

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  8. आप सब को तारीफ़ के लिए धन्यवाद. यह तो तकनीकी विकास, इंटरनेट और डिजिटल फोटोग्राफ़ी जैसी तकनीकों की वजह से आ मेरे जैसे लोगों को अपने काम से अलग कुछ भी करने का मौका देती हैं, बस समय होना चाहिये. इंटरनेट पर अन्य लोग क्या कर रहे हैं, किस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, यह सब भी सीखने को मिलता है और प्रेरणा भी मिलती है. अफलातून जी, आप की उपमा बहुत अच्छी लगी.

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  9. wakai aapki khinchi tasveerein behad khubsurat hain. tazgi ka ahsaas karati hain

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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