मंगलवार, सितंबर 27, 2005

गालियों का सामाजिक महत्व

यह बात पहले अनूप ने चलायी, फिर कालीचरण जी ने उसमें भोपाल का किस्सा जोड़ दिया, तो सोचा कि ऐसे गंभीर विषय पर और विचार होना चाहिये. गालियों की बात करेंगे तो गालियों का विवरण भी कुछ स्पष्ट होगा, हालाँकि मैं कोशिश करुँगा कि यह चिट्ठा शालीनता की सीमा के बहुत अधिक बाहर न जाये. अगर आप नाबालिग हैं या फिर आप को ऐसी बातों से परेशानी होती है, तो अच्छा होगा कि आप इस चिट्ठे को बंद करके कुछ और पढ़ें.

गाली एक तरीका है अपना गुस्सा व्यक्त्त करने का. यानि आप बजाये मारा पीटी करने के, कुछ कह कर अपनी नापसंदगी जाहिर कीजिये. जैसे कालीचरण जी कहते हैं, एक उम्र के बाद, हम गाली देने में कुछ संयम बरतने लगते हैं. गुस्सा आये भी, तो गाली को मन ही मन देते हैं, और ऊपर से मुस्कुरा कर कहते हैं, "नहीं, नहीं, कोई बात नहीं. इसे अपना ही समझिये."

गाली हम आनंद के लिए भी दे सकते हैं, वह आनंद जो समाज से मना की हुई बातों को करने से मिलता है. बचपन से ही परिवार और समाज हमें सिखाते हें कि क्या सही है और क्या गलत. गलत कहे जाने वाले काम को करके, हम अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रा को जताते हैं और यार दोस्तों में अच्छी अच्छी, नयी गालियाँ बनाने में बहुत आनंद है.

गाली अपनी शक्त्ति दिखाने का भी माध्यम है. गाली दे कर हम कहते हैं कि तुम हमसे छोटे हो, कमजोर हो, हीन हो. यह सब उद्देश्य तभी पूरे हो सकते हैं, अगर गाली सुनने वाले को बुरी लगे. इसलिए गालियों से हमें यह मालूम चलता हे कि हमारे समाज में किस चीज़ को अधिक बुरा माना जाता है.

पिता के वैध होने या न होने से "हरामी" जैसी गाली बनती है. शायद इस शब्द से हमारा जमीन जायदाद के वारिस होने का सवाल भी जुड़ा हुआ है. पर आजकल, इस गाली की कीमत बहुत कम है, शायद इसलिए भी कि आज तलाक, दूसरी शादी और शादी के बाहर प्रेम का जमाना है, जिसमें हरामी शब्द की ठीक से व्याख्या करना आसान नहीं है ?

अधिकतर गालियाँ यौन अंगों और यौन सम्बंधों से जुड़ी हुई हैं और जबरदस्ती यौन संपर्क की बात करती हैं, जो कि अपनी ताकत दिखाने का तरीका है, यानि मैं चाहूँ तो ..... भारत ही नहीं सभी सभ्यताओं में शायद गालियाँ यौन अंगों तथा यौन सम्बंधों से जड़ी हैं. इटली में आम बोल चाल में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली गाली है, cazzo यानि पुरुष यौन अंग. इसे पुरुष और स्त्रियाँ बिना किसी परेशानी से बोलते हैं, टीवी पर भी आम है. अन्य गालियाँ भी, स्त्री और पुरुष दोनो ही बिना किसी हिचक के बोलते हैं जैसे fottiti तथा vaffanculo जोकि विभिन्न प्रकार के यौन सम्बंधों की धमकियाँ हैं. शुरु शुरु में, सड़क पर या बस में अच्छी पढ़ी लिखी लड़कियों और औरतों को यौन अंग या यौन सम्बंध की गाली देते सुन कर बहुत अचरज होता था.

पर भारतीय गालियों में एक बात खास है. हमारी अधिकतर गालियाँ स्त्रियों की बात करती हैं. यानि आप का झगड़ा किसी से हो, गाली में अक्सर उसकी माँ या बहन को पुकारा जाता है. ऐसी कुछ गालियाँ अंग्रेजी में भी हैं पर उनका उपयोग आम नहीं है. अंग्रेजी, फ्राँसिसी, इतालवी भाषाओं में आप को गाली देने वाला आप से जबरदस्ती यौन सम्बंध की बात करेगा, आप की माँ, बहन या पत्नी से नहीं. क्या करण है इसका ? शायद इसलिए कि स्त्री और लड़की को हम लोग अधिक हीन समझते हैं ?



आप इटली में आयें और कोई सुंदर सी युवती आप को गस्से से गाली दे कि वह जबरदस्ती आप से यौन सम्बंध रखेगी, तो आप को कैसा लगेगा ? अवश्य आप के मन में लड्डू फूटेंगे, सोचेंगे, यही तो चाहता हूँ मैं. पर सावधान रहियेगा, यहाँ सेक्स दुकानों में कई खिलौने मिलते हैं, कहीं लेने के देने न पड़ जायें.

4 टिप्‍पणियां:

  1. हमने सोचा था आपने शुरु कर दिया। अब और लोग लिखेंगे ।ऐसे ही होती है गाली-गलौज। आगे मेरे लिखने के लिये रास्ता आपने साफ कर दिया। कोई टोकेगा तो हम कहेंगे- हम तो सुनील जी बात को आगे बढ़ा रहे हैं। महाजनों एन गत: स: पन्था।

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  2. कई बार गाली अपनेपन का भी सूचक होती है। भीष्म साहनी की कहानी "ओ हरामज़ादे" यदि नहीं पढ़ी है, तो ज़रूर पढ़िए।

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  3. जब गालीयों की बात चली है तो इन गालीयों पर भी गौर फरमाया जाये

    चंद्रधर शर्मा द्वारा रचित "उसने कहा था"

    आशीष

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  4. आज बडे मूड से घूमने के लिये निकला था,दो नौजवान गली के मोड से गुजरे और अपने एक साथी को पुकार कहा कि "ओय छिनाल के सांड,इधर आ",गाली का असली रूप सामने करने पर एक ही बात सामने आती है कि पहले सामने वाले की माँ को वैश्या बनाया,फ़िर सामने वाले को आवारा छोरियों के पीछे घूमने वाला बना दिया,यह गालियां समाज से निकलती है और इन गालियों के पीछे कितने लोग आज भी भारतीय जेलों में आजीवन कारावास भुगत रहे है,कितने लोग गालियों के पीछे तबाह हो चुके है,लेकिन गालियां फ़िर भी जिन्दा है,यह सामाजिक संस्कार है,और जो व्यक्ति जिस समाज मे पला बढा होता है उसी के अनुसार वह अपनी जुबान को अपना लेता है,अक्सर कंजे आदमी को कंजड भी कह दिया जाता है,बिना बाल के व्यक्ति को गंजा कहने से कोई नही चूकता है,अपंगता के कारण एक पैर के आदमी को लंगडा कह कर बुलाया जाता है,एक आंख से विहीन आदमी को काणा कह कर बुलाया जाता है,एक कहावत भी कही है "काणा काणा मत कहो,काणा जायेगा रूठ,धीरे धीरे पूंछ लो तेरी कैसे गयी है फ़ूट",इसके अलावा भी कही कहीं जाति बाहुल्य क्षेत्र में अगर एक पंडित है तो उसे पंडिता कह कर बुलाया जाता है,ठाकुर है तो ठकुरा कह कर बुलाया जाता है,नाई है तो नउआ कह कर बुलाया जाता है,घर के अन्दर माँ जब गांव की बेटी को बुरा भला कहती है तो कलमुही के अलावा और कोई बात नही की जाती है,आदि बाते सुनने के लिये मिलती है,लेकिन एक बात जरूर है कि गाली भी एक मंत्र की तरह से काम करती है,सामने वाले को माँ की गाली तो उसके शरीर के सभी तत्व फ़डक उठेंगे और मंत्र शक्ति की तरह से वह खोपडा फ़ोडने से नही चूक सकता है।

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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