बुधवार, सितंबर 28, 2005

यह शरीर किसका ?

कल की तरह आज का विषय भी यौन सम्बंधी है. यही नहीं, कठोर भी है, जिसे पढ़ कर अच्छा न लगे. अगर आप फिर भी इसे पढ़ते हैं, और आप को बुरा लगे तो मुझे नहीं कोसियेगा.

आज बात करना चाहता हूँ स्त्री यौन अंगो की कटायी की, यानि कि female genital mutilation और इसके खिलाफ वारिस दिरिए की लड़ाई की. वारिस सोमालिया से हैं और एक प्रसिद्ध माडल हैं, कुछ फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं. उन्होंने अपने जीवन के बारे में एक किताब लिखी है Desert Flower (रेगिस्तान का फ़ूल). वह इस किताब में अपनी, अपनी बहनों की और अपने जैसी लाखों लड़कियों के जीवन में होने वाले इस समाज स्वीकृत अपराध के बारे में बताती हैं.


बहुत से देशों में, विषेशकर उत्तरी अफ्रीका तथा मध्य पूर्व में, यह प्रथा प्रचलित है. विश्व स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, सोमालिया, इथिओपिया, कीनिया जैसे देशों में करीब ६० प्रतिशत लड़कियों और स्त्रियों के जीवन प्रभावित करती है. स्त्री यौन अंगों की कटायी अलग अलग देशों में भिन्न तरह से होती है. सबसे अधिक प्रचलित तरीका है कि यौन अंग का बाहरी हिस्सा काट दिया जाये और अंग खुला कर दिया जाये. पर बहुत सी जगह, इसमें स्त्री यौन अंग को भीतर तक काट कर उसे धागे से सिल दिया जाता है. यह "आपरेशन" गाँव की दाईयाँ बिना किसी एनेस्थीसिया के करती हैं और अधिक खून निकलने से या इन्फेक्शन होने से कई बार इसमें लड़की की मृत्यु भी हो जाती है. आपरेशन सात-आठ साल की उम्र से ले कर सतरह-अठारह बरस तक किया जाता है. पिशाब करने के दौरान, माहवारी के समय और बच्चा पैदा करते समय इससे लड़की को पीड़ा होती है जो सारा जीवन उसे नहीं छोड़ती.

पर बात केवल गरीब, अनपढ़, गाँव में रहने वालों की नहीं, धनवान परिवार इसे शहरों में डाक्टरों की सहायता से पूरी हिफाजत से भी करवाते हैं. यूरोप और अमरीका में रहने वाले प्रवासी, इसे अपने समाज के प्रवासी डाक्टरों की मदद से छुप छुप कर करवाते हैं. कुछ बार कहा गया है कि यह मुसलमानों मे ही होता है पर यह सच नहीं है. जिन जगहों पर यह प्रथा प्रचलित है, वहाँ सभी धर्मों के लोग इसे अपनाते हैं.

कहते हैं कि यह प्रथा उनकी संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यक है और इसे रोकने के सभी प्रयासों पर दंगे शुरु हो जाते हैं. यह प्रथा जरुरी है ताकि लड़कियों का कुँवारापन उनके पतियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके. इसका अन्य फायदा है कि इससे स्त्री को यौन सम्बंधों में पीड़ा होगी, इसलिए वह परमर्दों को नहीं देखेगी और परिवार टूटने से बचेंगे. जिन समाजों में लड़कियों को अपने से उम्र में बड़े पुरुषों से उनके विवाह का चलन हो, वहाँ परिवार की रक्षा और भी जरुरी हो जाती है.

शादी की रात को पति देव अपने जोर से उस धागे से सिले अंग को खोलेंगे, तो कसे बंधे अंग में उन्हे अधिक आनंद आयेगा. उनका आनंद कम न हो, इसलिए कई जगह बच्चा जनने के बाद, सूई धागे से अंग को दोबारा सिल कर कसा जाता है. वारिस पूछती है, "यह शरीर किसका है, असली प्रश्न तो यही है ? मेरे पिता का, मेरे भाईयों का, मेरे पति का, मेरे बेटों का ?" आप क्या उत्तर देंगे उसे ?

आज मुझे तीन दिन के लिए बाहर जाना है इसलिए रविवार तक चिट्ठे की छुट्टी.

3 टिप्‍पणियां:

  1. क्या विडम्बना है? और क्या बकवास तरीका है स्त्रियों को परपुरुष की तरफ़ आकर्षित होने से रोकने का। क्या वो रोक सके कुछ? नही..क्योंकि दुनिया मे सबसे अधिक एड्स के रोगी आपको अफ़्रीका मे ही मिलेंगे। वहाँ कोई ऐसा मच्छर नही जिसके काटने से एड्स हो।

    स्त्रियों पर किया जाने वाला ये अत्याचार बन्द होना चाहिये।

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  2. शरीर पर की जाने वाली किसी भी स्थाई विकृति को मैं ग़लत मानता हूँ, और बलपूर्वक हो तो महापाप है। बालकों के सर्कमसिजन का भी कोई औचित्य नहीं है। यहाँ कुछ सूचनाएँ देखिए। मुझे तो कान-नाक भी ज़बरदस्ती छिदवाना ग़लत लगता है। बच्चा बड़ा हो कर अपनी मर्ज़ी से जो चाहे छिदवाए, जो चाहे गुदवाए, जो चाहे कटवाए।

    स्त्रियों के कौमार्य को तालाबन्द रखने पर एक चुटकुला बहुत प्रचलित है। सेनापति को युद्ध पर जाने का आदेश हुआ तो उन्होंने अपनी सुन्दर पत्नी के कौमार्य द्वार को ताला लगा दिया और चाबी अपने सब से विश्वस्त मित्र को दे दी। सेनापति की सवारी अभी शहर के दरवाज़े से निकली ही थी कि दोस्त हांफता हुआ आया, "सेनापति, आप ने ग़लती से ग़लत चाबी दे दी मुझे।"

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  3. kaise kasie log aur kaise kasie haadse....jaalim samaj ke jaalim logo ke banaye jaalim niyam.

    Raman, joke accha hai, senapati ne phir sahi chaabi di ki nahi...;)

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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