सोमवार, अप्रैल 23, 2007

ज्हाँग यू का बदला

चीन के फ़िल्म जगत में कुमारी ज्हाँग यू (Zhang Yu) ने तूफ़ान मचा दिया. बात कुछ वैसी ही थी जैसी कुछ समय पहले भारत में स्ट्रिँगर आपरेशन में शक्ती कपूर जैसे "अभिनेताओं" के साथ हुई थी, जब महिला पत्रकार अभिनेत्री बनने की इच्छा रखने वाली युवती बन कर फ़िल्म जगत के जाने माने लोगों से मिलीं और छिप कर इस मिलन की वीडियो खींचे जिनसे स्पष्ट होता था कि अभिनेत्री बनाने का वायदा करके कुछ लोग युवतियों से उसकी कीमत माँगते थे.

कुमारी यू चीन के मध्य भाग के राज्य हूबेई के गाँव से हैं और वह बेजिंग गायिका बनने की इच्छा से आयीं थीं. बहुत कोशिश करने पर भी उन्हें गायिका काम नहीं मिला पर फ़िल्मों में कुछ छोटे मोटे एस्ट्रा के भाग मिले. उन्होंने बहुत से फ़िल्म निर्माता, निर्देशकों आदि से मिलने की कोशिश की, जो शारीरिक सम्बंधों की कीमत माँगते और फ़िल्म में भाग देने का वायदा करते.

14 नवंबर 2006 को यू ने अपना चिट्ठे पर जाने माने चीनी फिल्म निर्माता निर्देशकों के वीडियो दिखाना प्रारम्भ किया और सारे देश में खलबली मचा दी. अब तक करीब बीस वीडियो दिखा चुकीं हैं और कहती हैं कि और भी हैं.

भारत में हुए स्ट्रिँग आपरेशन में और कुमारी यू के वीडियो आपरेशन में फर्क केवल इतना है कि भारत में धँधे वाले फिल्मी लोगों को धोखा दे कर उनकी तस्वीरें खींची गयीं थीं जबकि यू के वीडियो में दिखने वाले लोगों को मालूम था कि वीडियो लिया जा रहा है. यू का कहना है कि इन लोगों को वीडियो देख कर खुशी होती थी, इसलिए भी कि उन्हें अपनी शक्ति पर पूरा भरोसा था और सोचते थे कि यू उनके विरुद्ध कुछ नहीं कर पायेंगी.

शुरु में ऐसा ही हुआ. यू ने तीन लोगों पर मुकदमा किया कि इन्होंने वायदा कर के मेरे शरीर का उपयोग किया और फ़िर मुझे काम भी नहीं दिया. चीनी अदालत ने यह मुकदमा रद्द कर दिया. यू कहती हैं कि तब उन्होंने चिट्ठे के द्वारा यह बात लोगों तक पहुँचाने की सोची. जिस दिन उनके चिट्ठे पर पहला वीडियो निकला, पहले बारह घँटों में उसे तीन लाख लोगों ने देखा, तबसे उनके वीडियो को लोग देखते ही जा रहे हैं और उनका चिट्ठा चीन की सबसे अधिक देखी जानी वाला अंतर्जाल पृष्ठों में से बन गया है.

यू कहतीं हैं कि चीनी औरतों ने अब तक सब कुछ चुप रह कर सहना ही सीखा था पर अब वह चुप नहीं रहेंगीं और अपने अधिकारों के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. आज यू के पास नाम, प्रसिद्धि, काम सब कुछ हैं. अपने जीवन पर वह एक किताब लिख रहीं हैं.




इस तरह की बात हो तो अक्सर लोग स्त्री पर ही उँगली उठाते हें कि उसका चरित्र अच्छा नहीं या वह जरुरत से अधिक महत्वाकाँक्षी है, इत्यादि, इसलिए कम ही स्त्रियाँ इस तरह की बात को ले कर सबके सामने आने का साहस कर सकती हैं. पर अंतर्जाल और चिट्ठों के द्वारा अपने सच को सबके सामने रख पाना क्या सचमुच आम जीवन में निर्बलों को लड़ने का साधन दे सकता है? क्या घर में हिंसा या अपमान की शिकार माँ और बच्चे इस तरह अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं? अगर आप अपने चिट्ठे पर यू की तरह सेक्स के वीडियो रखें तो शायद लोग उसे देखने पहुँच जायें पर आम हिंसा को कौन देखने जायेगा?

6 टिप्‍पणियां:

  1. कामना है कि यू जैसे चिट्ठों पर सरकारी रोक न लगे।

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  2. मुझे आश्चर्य ना होगा अगर सुश्री का चिट्ठा गायब कर दिया जाए. :)

    चीन मे सबकुछ सम्भव है

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  3. संजय बेंगाणी23 अप्रैल 2007 को 2:58 pm

    आम हिंसा को कौन देखने जायेगा?

    पता नहीं.

    मगर अपनी बात अधिकतम लोगो तक पहूँचाना जरूर सम्भव हो गया है.

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  4. ये कला संस्कृति की दुनिया में ऐसा होता है देखकर एक बार फिर अफ़सोस हुआ!

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  5. चीन की यात्रा करके आये अपने मित्रों से मैं ने सुना है कि चीनी समाज में स्त्री की स्थिति हमारे समाज से काफ़ी अलग है.. न तो उन्हे नीची नज़र से देखा जाता है.. न आम जीवन में छेड़छाड़ करके अपमानित किया जाता है.. और न ही गालियों में घर की स्त्रियों से कोई सम्बंध जोड़ा जाता है.. इतना सब कुछ एक समाजवादी राज्य के चलते ही नहीं हुआ होगा.. परम्परा और संस्कृति का कोई लम्बा और गहरा असर होगा..

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  6. नहीं अभय, परंपरा और संस्कृति का हाथ नहीं है । चीन में स्त्रियों को कभी भी कोई विशेष स्थान नहीं दिया गया था । जहाँ की सभ्रान्त घर की बच्चियों के पैरों को तोड़ मरोड़ कर छोटे से छोटे जूते में फिट किया जाता था और फिर उन्हें बढ़ने नहीं दिया जाता था वहाँ की संस्कृति से आप किस प्रकार की बराबरी या आदर की अपेक्षा कर सकते हैं ?
    घुघूती बासूती

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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