शनिवार, अप्रैल 19, 2008

फ़ुल गेंदवा न मारो

शायद यहाँ बसंत का मौसम है इसलिए या न जाने क्यों, अचानक मन में गीत के शब्द आयेः

"फ़ूलों के रंग से दिल की कलम से तुझको लिखी रोज़ बाती ..." , फ़िल्म थी प्रेमपुजारी और इसे गा रहे थे देवआनंद. साथ में थी वहीदा रहमान और जाहिदा.

जैसे अक्सर विचारों के साथ होता है, बात शुरु कहाँ से होती है और कहाँ जाती है, पता नहीं चलता. सोचा फ़ूलों से शुरु होने वाले अन्य कौन से गाने हैं?

दो अन्य गाने तो तुरंत याद आ गयेः

"फ़ूलों का तारों का सबका कहना है, एक हज़ारों में मेरी बहना है", यह भी देवआनंद साहब की फ़िल्म थी "हरे रामा हरे कृष्णा", साथ में थीं मुम्ताज़ और ज़ीनत अमान.

और, "फ़ूलों ने कहा कलियों से, कलियों ने कहा भँवरों से...". यह कौन सी फ़िल्म का है, यह नहीं मालूम.

फ़िर बहुत सोच कर याद आया, "फ़ुल गेदवा न मारो, न मारो लगत कलेजवा में चोट..". यह कौन सी फ़िल्म से है, यह भी याद नहीं पर शायद महमूद पर फ़िल्माया गया था. बस, और कोई गीत याद नहीं आता जो फ़ूल शब्द से शुरु होता हो. अगर आप में से किसी को कोई ऐसा गीत मालूम हो तो मुझे बताईयेगा.

साथ ही कुछ फ़ूलों की तस्वीरें भी प्रस्तुत हैं.

















12 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे खयाल में पहले गाने में तुझको लिखी रोज 'बाती' की जगह 'पाती' होना चाहिए.

    इटली का बसंत देखकर मन प्रसन्‍न हो गया.

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  2. बहुत खू़बसूरत ! लेकिन इटली में अभी वसन्त होगा ?
    - अफ़लातून

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  3. कहने को ही बसंत है, इस साल तो सर्दी जाने का नाम ही नहीं ले रही और कोट स्वेटर से छुटकारा नहीं मिल रहा!

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  4. ***ने कहा फूलो से हँसो तो वो खिलखिला कर हँस दिये.


    बहारों फूल बरसाओ...मेरा महबूब आया है...


    और तो याद नहीं आ रहे. :)

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  5. संजय, ऐसे वाले नहीं, गाने का पहला अक्षर फ़ूल वाला होना चाहिये.

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  6. " फूल तुम्हेँ भेजा है खत मेँ
    फूल नहीँ , मेरा दील है "

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  7. अनगिनत गाने हैं फूलों के । 'बाग़ों में कैसे फूल खिलते है' । फूल खिले हैं गुलशन गुलशन, मैंने कहा फूलों से...ओहो ।
    और हां फुलगेंदवा ना मारो..फिल्‍म दूज का चांद का गीत है । मन्‍नाडे के अनमोल गीतों में इसका शुमार होता है । सुनना है तो बताएं ।

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  8. आपने इस गर्म महीने में बसंत की चर्चा करके काफी ठण्डक प्रदान की है। धन्यवाद, एवं शुभकामनाएं।

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  9. मिले न फूल तो कांटो से दोस्ती कर ली। डाक्टर साहब एक बार कांटो को कैमरे में कैद कर लोगों के सामने पेश करें। अच्छा लगेगा। हम जानते हैं गुलाब में कांटे होते हैं तो नागफनी का फूल भी बहुत खूबसूरत होता है। क्या ख्याल है।

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  10. इटली में हमारे एक मित्र हैं जिन्हें कीड़े मकोड़ों की तस्वीरों में ही आनंद मिलता है. पर काँटों की तस्वीरें चाहने वाले और भी कोई हैं, मुझे नहीं मालूम. देखना पड़ेगा मेरी खींचीं पेड़ों, पत्तों की तस्वीरों में कोई काँटे भी हैं या नहीं.:-)

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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