शनिवार, जनवरी 02, 2010

टाँग कहाँ, हाथ कहाँ?

जब से फोटोशोप जैसे प्रोग्राम बने है, मानव शरीर को तोड़ने या जोड़ने के नये अवसर मिलने लगे हैं, जिनसे डा. फ्रेंकेस्टाईन की कहानियों की याद आ जाती है. फोटोशोप डिज़ास्टर के चिट्ठे पर उन तस्वीरों को जगह मिलती है जिनमें शरीर के अंगों को तोड़ने जोड़ने का काम कुछ विषेश सफ़ाई से किया जाता है. इस चिट्ठे से कुछ ऐसी तस्वीरों के नमूने प्रस्तुत हैं जिनमें शरीर के अंगो को तोड़ने जोड़ने में प्लास्टिक सर्जरी बहुत बढ़िया की गयी है.

इस पहली तस्वीर में देखिये और सोचिये कि इस बालिका की बायीं टांग कहाँ गयी? शायद उसे बिल्ली ले गयी?


इस दूसरी तस्वीर वाली कन्या के शरीर के ऊपरी हिस्से के वस्त्र चुरा लिये गये हैं लेकिन शायद वस्त्र उतारते समय शरीर के कुछ भाग भी साथ ही चोरी हो गये थे या शायद, यह कन्या असल में कन्या का पति है?


इस तीसरी कन्या के बायें हाथ में गलती से शायद उसका पैर लगा दिया गया था?


कितनी ज़ालिम है यह माँ जिसने अपनी बड़ी बेटी को टब और दीवार के बीच में दबा कर उसकी टाँगें ही काट दीं.


इन अगले साहब की तस्वीर वैसे तो बहुत बढ़िया है लेकिन कार के दरवाज़े का हैंडल अगर किसी अन्य जगह होता तो शायद बेहतर नहीं होता?


आप सब को नववर्ष की शुभकामनाएँ.

3 टिप्‍पणियां:

  1. उक्त ब्लॉग पर विभिन्न विज्ञापन या पोस्टर आदि पर फोटो के साथ काम करते समय भूल रह जाती है रखा जाता है. इस ब्लॉग को नियमीत देखता रहा हूँ. आखिर ज्यादातर समय फोटोशोप पर काम करते रहना व्यवसायिक मजबूरी है. तो काम के बीच थोड़ा मनोरंजन हो जाता है.

    आपको व आपके परिवार को ईसा के नए साल की बधाई. शुभकामनाएं.

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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