गुरुवार, जून 01, 2006

मोटे, छोटे देश

मेले में कभी कभी जादू के शीशे वाला कमरा भी होता है, किसी शीशे में आप बिल्कुल पतले लगते हैं और किसी में आप के गाल फ़ूल जाते हैं. वर्ल्ड मेप्पर के नक्शे देख कर भी लगता है मानो जादू के शीशों के कमरे में घुस आये हों. यह नक्शे बनाने वाले डेन्नी डोरलिंग और अन्ना बारफोर्ड के बारे में न्यू साईंटिस्ट (New Scientist) में पढ़ा. इन नक्शों को बनाने के लिए उन्होंने मिशिगेन तथा एन आर्बर में शोध करने वाले माईकल गेस्टनर तथा मार्क न्यूमेन के बनायी आलगोरिदम का प्रयोग किया है.



आम नक्शे तो हर देश के धरातल को दिखाते हैं जैसे ऊपर वाले नक्शे में दिखता है, वर्ल्ड मेप्पर के नक्शे देशों को विभिन्न मापदँडों से तोलते हैं, जैसे कि देश की आबादी. देश के धरातल के मुकाबले में जितनी आबादी अधिक होगी, उतना ही वह देश फूल जायेगा, जितनी आबादी कम होगी, उतना ही वह देश पतला दिखेगा. नीचे वाले नक्शे में देखिये, अमरीका, दक्षिण अमरीका के देश कितने पतले हैं और एशिया के देश कितने मोटे.



प्रस्तुत है वर्ल्ड मेप्पर से कुछ अन्य नक्शे. सबसे पहले देशों की पर्यटन से होने वाली आमदनी का नक्शा.



अगले नक्शे में है कोपीराईटिंग और रायल्टीस से होने वाली आमदनी.



इस नक्शे में विभिन्न देशों में दो पहिये से चलने वाले वाहनों की संख्या को देखिये, भारत कितना आगे है यहाँ.



इस नक्शे में देखिये कपड़ों के निर्यात से होने वाली आमदनी को



और यह अंतिम नक्शा है रेलगाड़ी से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या पर बना.



और भी बहुत सारे रोचक नक्शे हैं वर्ल्ड मेप्पर पर. सोचने पर मजबूर कर देते हैं न यह नक्शे ?

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही रोचक चीज है। जीडीपी और प्रति व्यक्ती आय पर हमारा भारत दुनिया में कितना नजर आता है यह भी देखना रुचिकर होगा।

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  2. सुनिल जीः
    तसवीरों के साथ जानकारी लेख लिखने के लिऐ आपका शुक्रिया।

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  3. बहुत ही रोचक जानकारी है, सुनील जी। धन्यवाद।

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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