सोमवार, अक्तूबर 24, 2011

विदेशी पनीर के देसी बनानेवाले


इतालवी पारमिज़ान पनीर दुनिया भर में प्रसिद्ध है. वैसे तो बहुत से देशों में लोगों ने इसे बनाने की कोशिश की है लेकिन कहते हैं कि जिस तरह का पनीर इटली के उत्तरी पूर्व भाग के शहर पारमा तथा रेज्जोइमीलिया में बनता है वैसा दुनिया में कहीं और नहीं बनता. इसकी वजह वहाँ के पानी तथा गायों को खिलायी जाने वाली घास में बतायी जाती है. पारमिज़ान पनीर को घिस कर पास्ता के साथ खाते हैं और अन्य कई पकवानों में भी इसका प्रयोग होता है. वैसे तो पिछले कुछ वर्षों से इटली के विभिन्न उद्योगों में गिरावट आयी है लेकिन लगता है कि पारमिज़ान पनीर के चाहने वालों ने इस पनीर के बनाने वालों के काम को सुरक्षित रखा है.

करीब पंद्रह बीस वर्ष पहले पारमिज़ान पनीर को बनाने वाले उद्योग को काम करने वाले मिलने में कठिनाई होने लगी. इतालवी युवक कृषि से जुड़े सब काम छोड़ रहे थे, गायों तथा भैंसों की देखभाल करने वाले नहीं मिलते थे. तब इस काम का मशीनीकरण होने लगा पर साथ ही पंजाब से आने वाले भारतीय युवकों को इस काम के लिए बुलाया जाने लगा. आज उत्तरी इटली में करीब 25 हज़ार पंजाबी युवक, जिनमें से अधिकतर सिख हैं, इस काम में लगे हैं. यहीं के छोटे से शहर नोवेलारा में यूरोप का सबसे बड़ा गुरुद्वारा भी बना है.

यानि दुनिया भर में निर्यात होने वाले इतालवी पारमिज़ान पनीर को बनाने वाले चालिस प्रतिशत कार्यकर्ता भारतीय हैं. वैसे तो इटली में भारतीय प्रवासी बहुत अधिक नहीं हैं लेकिन इस काम में केवल भारतीय पंजाबी प्रवसियों को ही जगह मिलती है.

आज सुबह इस विषय पर इटली के रिपुब्लिका टेलीविज़न पर छोटा सा समाचार देखा जिसमें भारत से सात वर्ष पहले आये मन्जीत सिंह का साक्षात्कार है. उन्हें यह काम सिखाया कम्पनी के मालिक ने जो कहते हें कि भारत से आये प्रवासी यहाँ के समाज में घुलमिल गये हैं और उनके बिना इस काम को चलाना असम्भव हो जाता.

आप चाहें तो इस समाचार को इस लिंक पर देख सकते हैं.


12 टिप्‍पणियां:

  1. are waah ...panjabi kahi bhi survive kar sakte hai ..jankari ke liye dhanyawaad

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  2. पंजाबियों की महेनत के जलवे समुन्दरों पार हैं.....


    दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार कीजिए.

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  3. कल के चर्चा मंच पर, लिंको की है धूम।
    अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं

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  5. ये तो हाईब्रिड पनीर हो गया.

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  6. इस पर कहने का मन होता है मेरा भारत महान.

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  7. बहुत सुन्दर waah !
    आपको दीप पर्व की सपरिवार सादर बधाईयाँ....

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  8. as far as i know cottage cheese is paneer and rest all are just cheese

    we cannot call cheese as paneer

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  9. मेरे मन मे भी वही शंका थी जो रचनाजी ने कही है। सामान्यतः पनीर और चीज दोनो अलग है!

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  10. आशीष जी और रचना जी, टिप्पणी के लिए धन्यवाद. आप की बात भारत की दृष्टि से देखा जाये तो ठीक लगती है, क्योंकि भारत में पराम्परिक तरीके से एक तरह का ही पनीर बनाया है, जबकि अमूल द्वारा बनाये कुछ कड़े हुए पनीर पिछले तीन चार दशकों में ही आये हैं. पिछले दशक में कुछ नये तरीके के पनीर यूरोप से भी बाज़ार में आने लगे हैं जैसे की फ्राँस का केममबर्ट, इटली का मुज्ज़ारेल्ला, जिन सब को अंग्रेज़ी में चीज़ कहते हैं. लेकिन पनीर शब्द को देखा जाये जो कि तुर्की और अरब देशों में प्रयोग किया जाता है, इसे चीज़ के अर्थ में प्रयोग करते हैं, यानि एक ही शब्द में विभिन्न तरह के चीज़ जिनमें से भारतीय पनीर एक है. इस दृष्टि से मुझे पनीर शब्द को दोनो तरह से प्रयोग करना ठीक लगता है कि भारतीय पारामपरिक पनीर तथा तरह तरह के वह दूध से बने पदार्थ जिनके लिए अंग्रेज़ी में चीज़ का प्रयोग किया जाता है.

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  11. महोदय जैसा कि आपको पहले ही सूचित किया जा चुका कि आपके यात्रा-वृत्त एक शोध के लिए सन्दर्भित किए गये हैं उसको जिस रूप में प्रस्तुत किया गया है वह ब्लॉग ‘हिन्दी भाषा और साहित्य’ http://shalinikikalamse.blogspot.com/2011/10/blog-post.html पर प्रकाशित किया जा रहा है। आपसे अनुरोध है कि आप इस ब्लॉग पर तशरीफ़ लाएं और अपनी महत्तवपूर्ण टिप्पणी दें। हाँ टिप्पणी में आभार मत जताइएगा वरन् यात्रा-साहित्य और ब्लॉगों पर प्रकाशित यात्रा-वृत्तों के बारे में अपनी अमूल्य राय दीजिएगा। क्योंकि यहीं से प्रिंट निकालकर उसे शोध प्रबन्ध में आपकी टिप्पणी के साथ शामिल करना है। सादर-
    -शालिनी पाण्डेय

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