सुनील दीपक के उपन्यास
1. देवी-प्रतिमा के रक्षक
यह एक एक्शन-रोमाँच-फैंतासी किस्म का लघु उपन्यास है जो किशोर और नवजवान पाठकों को ध्यान में रख कर लिखा गया है।जासूसी उपन्यास, जेम्स बॉन्ड किस्म का कथानक लिखने की बहुत सालों से मेरी इच्छा थी। वह सपना मैंने इस उपन्यास में पूरा किया है। इसके दो नायक है - एक जापानी याकूज़ा (खूनी) ताकानोरी ओकामा जो दक्षिण कोरिया के एक बुद्ध भिक्षुक की गुप्त-शक्ति वाली प्रतिमा को खोज रहे हैं और उनकी तलाश में भारत आते हैं। दूसरे हैं त्रिनेत्र, जिन्हें उन्हीं भिक्षुक ने बेटे की तरह पाला है। यह उपन्यास उत्तर-पूर्वी भारत में केन्द्रित है।
इसे लघु-उपन्यास कहना चाहिये क्योंकि यह केवल 48,000 शब्दों का है।
मैं इसके लिए प्रकाशक खोज रहा हूँ। इस उपन्यास के बारे में इस ब्लाग पर आप मेरे यह आलेख भी पढ़ सकते हैं:
एक नया फैंतासी उपन्यास (20 मार्च 2026)
2. मेरे अन्य उपन्यास
मेरे दो अन्य सामाजिक-पारिवारिक उपन्यास तैयार हैं, आशा है कि अगले महीनों में कोई प्रकाशक मिलेगा और यह भी पाठकों के लिए उपलब्ध हो जायेंगे। यह दोनों उपन्यास, कुछ गम्भीर हैं लेकिन छोटे हैं, साठ हज़ार शब्दों से कम लम्बे हैं।
उनके अतिरिक्त, मैं आजकल साईन्स-फिक्शन यानि वैज्ञानिक-कल्पना का उपन्यास लिख रहा हूँ। आने वाले दिनों में इस पृष्ठ पर आप को उन सबकी सूचना मिलेगी। दो अन्य उपन्यासों के पहले ड्राफ्ट भी तैयार हैं।
मुझे खुद पर आश्चर्य होता है कि अचानक बुढ़ापे में मुझे यह क्या हो गया कि एक उपन्यास समाप्त नहीं होता और कुछ और लिखने की इच्छा मन में जाग जाती है। शायद मुझे लिखने की जल्दी इस लिए हो रही क्योंकि मैं डरता हूँ कि यह जीवन अब कभी भी समाप्त हो सकता है, और उस दिन से पहले मैं मन की सब कहानियाँ लिखना चाहता हूँ।
कभी-कभी मन में आता है कि उपन्यासों को छपवाने की चिंता छोड़ कर, इन्हें सीधा ब्लाग से उपलब्ध करना चाहिये, अगर ढंग का प्रकाशक नहीं मिलेगा तो शायद यही करना पड़ेगा। इसका एक कारण यह भी है कि मुझे उपन्यासों से पैसा कमाने की आवश्यकता नहीं है, आनन्दपूर्ण जीवन-यापन के लिए मेरी पैंशन बहुत है।
आप की क्या राय है?

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"जो न कह सके" के आलेख पढ़ने एवं टिप्पणी के लिए डॉ. सुनील दीपक की ओर से आप का हार्दिक धन्यवाद.