शनिवार, जनवरी 21, 2006

नेपाल में

कल सुबह छः बजे पुलिस अचानक उनके घर में घुस आयी और उन्हें गिरफ्तार कर के ले गयी. मैं मथुरा प्रसाद जी की बात कर रहा हूँ जो एक समय में नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं. इसीलिए कल दिन भर मथुरा प्रसाद जी के जानने वालों के संदेश आते रहे. कुछ महीने पहले ही उनसे एक्वाडोर में जन स्वास्थ्य अभियान की आम सभा के दौरान मुलाकात हुई थी, और उन्हें वादा किया था कि अगली बार काठमाँडू जाऊँगा तो उन्हें मिलने अवश्य जाऊँगा. इन महीनों में मथुरा प्रसाद जी नें किसी डर से चुप रहना स्वीकार नहीं किया और ईमेल के द्वारा देश की बिगड़ती हालत के बारे में अपने बयान जारी रखे थे, जो शासन को निश्वय ही पसंद नहीं आये.

एक तरफ है एमरजैंसी जैसी हालत जिसमे जनतंत्र को दबा दिया गया है. दूसरी ओर है माओवादी क्राँतीकारी जो सामाजिक न्याय के नाम पर शुरु तो हुए थे पर जहाँ पहुँच गये हैं, वह न्याय कम, दूसरी तरह की तानीशाही अधिक लगता है. नेपाल के समाचार सुन कर बहुत चिंता होती है.

1 टिप्पणी:

  1. आप सच कह रहे हैं। पता नहीं हमारे पड़ोसी देशें अपना काम ठीक से क्यों नहीं चला सकते। पाकिस्तान, बंगलादेश, श्री लंका और नेपाल सब अपने आप से लड़ने पर तुले हुए हैं। भूटान ही एक देश है जो तरक्की की ओर बढ़ रहा है। यह हमारी सीमाओं की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है। दूसरी समस्या यह है कि अगर हम कुच्छ कहे तो उन्हे ऐसा लगता है कि हम उनके ज़्याती मामलों मे दखल दे रहे हैं।

    मोसीलागर

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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