शुक्रवार, नवंबर 09, 2007

ज्योति उत्सव

जब भी कोई त्योहार आता है तो घर से दूर विदेश में होना बहुत अखरता है. बाज़ारों का शोर और धक्का मुक्की, मिठाई के डिब्बे, पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों से बधाई, अँधेरी रात में टिमटिमाते दिये और मोमबत्तियाँ, आज दीवाली है तो उस सब की याद आना स्वाभाविक ही है.

यहाँ तो आज एक आम दिन है, अन्य दिनों जैसा, हालाँकि हमने शाम को बाहर खाना खाने जाने का प्रोग्राम बनाया है जहाँ भरतनाट्यम नृत्य भी होगा. कल यहाँ राजस्थान के लोकनर्तकों का कार्यक्रम भी है. फ़िर हम दिल को समझाते हैं कि चलो दूरी ही अच्छी है कम से कम पटाखों के शोर और प्रदूषण से तो बचेंगे!

आज दीपावली के शुभ अवसर पर मुझे बुद्ध प्रार्थना याद आती है, तमसो मा ज्योतिर्गमय. और यही शुभकामना है मेरी कि आप के परिवार में, घर में और दिलों में ज्योति का वास हो.

नीचे वाली तस्वीरें अभी हाल में चीन यात्रा में ली ज्यांग नाम के शहर में खींचीं थीं.






7 टिप्‍पणियां:

  1. दीपावली शुभ हो जी! चलें हम अमृतत्व की ओर। धीरे-धीरे।

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  2. बहुत सुंदर और वहतारीन रचना , अच्छी लगी !ज्योति - पर्व की ढेर सारी बधाईयाँ !

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  3. दिवाली की शुभकामनाएं डाक्टर साहब।
    आप विदेश में रहकर घर से दूर हैं..और हम देस में रहते हुए भी घर नही जा पाये इस बार...
    हाँ, मिठाई, शोरगुल और माहौल तो है ही। :)

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  4. सुनिल जी, आपको भी ज्योति पर्व की शुभकामनायें।

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  5. दीपावली की बधाई व शुभकामनाएं आपको भी आदरणीय!!

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  6. दीपावली पर शुभकामनाएँ । प्रार्थना बौद्ध नहीं है।

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  7. तस्वीरें दिल को छूती हैं. अजाला छिपाया नहीं जा सकता. दीपक का हो या ज्ञान का.

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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