शनिवार, अगस्त 13, 2011

राखी का वचन

कल शाम को काम से घर लौटा तो अपनी दोनो बहनों की ईमेल देखी जिसमें राखी बाँधने की बात थी. एक भारत में रहती है, दूसरी अमरीका में. पहले कई सालों तक दोनो बहनें लिफ़ाफ़े में राखी भेजती थीं जो अक्सर त्योहार के कुछ दिनों बाद मिलती थीं और मैं अपनी पत्नी या बेटे से कहता था कि बाँध दो.

अब कल्पना की राखी से ही काम चल जाता है. वह कहती हैं कि हम प्यार से भेज रहे हैं, और हम प्यार से कहते हैं कि मिल गयी तुम्हारी राखी. आज की दुनिया में वैसे ही इतना प्रदूषण हैं, इस तरह से राखी मनाना पर्यावरण के लिए भी अच्छा है.

आज सुबह फेसबुक के द्वारा कुछ इतालवी "मित्रों" के संदेश भी मिले, पुरुषों के भी और स्त्रियों के भी, "हैप्पी रक्षाबँधन". यहाँ बहुत से मित्र भारत प्रेमी हैं, जो देखते रहते हैं कि भारत में क्या हो रहा है और होली, दीवाली तथा अन्य त्योहारों पर याद दिला देते हैं कि वे भी हैं, जो हमारे बारे में सोचते हैं. क्या इस तरह के संदेश मिलने को भी राखी बाँधना समझा जाये? तो अन्य पुरुषों से राखी मिलने को क्या समझा जाये?

बचपन में सोचते थे कि राखी तो भाई बहन के पवित्र बँधन का त्योहार है. कुछ बड़े हुए तो मालूम चला कि लड़के लड़कियाँ दोस्ती को छिपाने के लिए भी राखी बाँध कर भाई बहन बन सकते हैं. अब यह फेसबुकिया नये राखी वाले भाई बहन की एक नयी श्रेणी बन जायेगी. जिस इतालवी "फेसबुक मित्र" ने भी मुझे रक्षाबँधन के संदेश भेजे, सबको मैंने यही उत्तर दिया कि मेरा भाई या बहन बनने के लिए बहुत धन्यवाद. बस यह नहीं लिखा उन्हें कि रक्षाबँधन पर वचन क्या दे रहा हूँ.

फ़िर इसी बात से सोचना शुरु किया कि आज की दुनिया में राखी जैसे त्योहार का क्या अर्थ है? युद्ध में जाते हुए भाई को राखी बाँधने वाली बहन उसकी मँगल कामना करती थी और भाई यह वचन देता था कि ज़रूरत पड़ने पर वह बहन की सहायता के लिए आयेगा. राखी भाई की रक्षा करेगी, और भाई बहन की रक्षा करेगा.

Graphics on Rakhi designed by Sunil Deepak, 2011

पर आज भाई युद्ध पर नहीं नौकरी पर जाते हैं, और बहने भी घर में नहीं बैठती, वे भी पढ़ने स्कूल व कोलिज जाती हैं, नौकरी करती हैं.

भारतीय समाज में बहन की रक्षा करने का अर्थ पितृपंथी समाज ने कई तरह से लगाया है जिसमें जाति और धर्म की रक्षा तथा नारी की शारीरिक पवित्रता की रक्षा की बाते जुड़ी हैं. बहन की रक्षा यानि परधर्मी उसकी इज़्ज़त न लूटें, वह परधर्मियों या जाति से बाहर लोगों से प्रेम या विवाह न करे, अगर वह ऐसा करती है तो उसे और उसके प्रेमी/पति को मार दिया जाये, शारीरिक इज़्ज़त खोने से तो मरना अच्छा है, पति न रहे तो सति होना अच्छा है, जैसी बहुत सी बातें "बहन की रक्षा" करने की बात से भी जुड़ी हैं.

नारी या परिवार की इज़्ज़त बचाने लिए औरतों को मारने को "अस्मिता बचाने के खून" (Honour Killing) जैसे नाम दिये गये हैं. इसी वजह से बलात्कार की शिकार औरतों और लड़कियों को कहा जाता है कि अब तुमने अपनी इज़्ज़त खो दी, अब तुममें खोट हो गया, अब तुम बेकार हो गयी, अब तुम से कौन विवाह करेगा? यहाँ तक कि उस लड़की से कहा जाता है कि वह अपने बलात्कारी से ही विवाह कर ले.

शायद बड़े शहरों में रहने वाले सोचें कि यह सब तो पुरानी बाते हैं लेकिन मेरे विचार में गाँवों और पिछड़ी जगहों में ही नहीं, आज भी हमारे शहरों में इस तरह के विचार ज़िन्दा हैं, और इनमें अगर बदलाव आ रहा है तो बहुत धीरे धीरे.

पाकिस्तानी फ़िल्म "खामोश पानी" में ऐसी ही एक सिख नारी की कहानी थी जिसका पात्र भारतीय अभिनेत्री किरण खेर ने निभाया था, जिसे उसका परिवार पाकिस्तान में ही पीछे छोड़ आया थे. अमृता प्रीतम की कहानी पर बनी चन्द्र प्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म "पिंजर" में भी कुछ इसी तरह की बात थी, जिसमें हिन्दु परिवार द्वारा त्यागी पूरो का पात्र अभिनेत्री उर्मिला मटोँडकर ने निभाया था. दोनो फ़िल्में भारत के विभाजन के समय की कहानी सुना रही थीं, लेकिन क्या इन साठ सालों में हमारे समाज की मानसिकता बदली है?

फ़िल्मों ही नहीं, अखबारों में भी इस तरह के समाचार आते ही रहते हैं.

मेरे विचार में आज रक्षाबँधन पर भाईयों को विचार करना चाहिये कि अपनी बहनों का क्या वचन दें जिससे यह समाज, और समाज में नारियों की यह परिस्थिति बदल सके?

जैसे किः "मेरी बहन, मैं वचन देता हूँ कि तुम्हे पढ़ने का, नौकरी करने का, मन पसंद साथी से प्यार और विवाह करने का मौका मिलेगा. वचन देता हूँ कि अगर तुम किसी वजह से पति के घर में सतायी जाओ तो तुम्हारा साथ दूँगा, संरक्षण दूँगा. कोई तुम पर ज़ोर लगाये कि बेटी पैदा करने के बजाया गर्भपात करो तो उसका विरोध करूँगा."

अगर आप से पूछा जाये कि आज के वातावरण में भाईयों को रक्षाबँधन पर बहनो को क्या वचन देना चाहिये, तो आप क्या वचन देना चाहेंगे?

***

18 टिप्‍पणियां:

  1. Today it is sad to see that many festivals have only retained the empty rituals. As you have rightly pointed out, tying of the rakhi is used by many youngsters as an excuse to be friends with the opposite sex, for which many parents are against. The promises you have listed at the end are precisely the ones every brother should give his sister, biological or otherwise, for no matter how liberated a woman is today, she still needs support to fight the social injustices.

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  3. मैं जीवन के उतार-चढ़ावों में सदा तुम्हारा साथ दूंगा...
    एक बहन को इससे अधिक की अपेक्षा होती ही नहीं।

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  4. वचन के नाम हमारे यहाँ प्रवचन अधिक है। पृतपंथी या पितृपंथी। विष्णु नागर सही कहते हैं कि शहरों के लोग यह समझ रहे हैं कि वे बहुत अधिक बदल गए, तो यह थोड़ ही सत्य है। कुछ लोग जो अभी अनुपात में इतने प्रतिशत भी नहीं हैं कि, उनका उल्लेख किया जाय। …किसी बलात्कारित से शादी करना पता नहीं क्यों अच्छा नहीं लगता लोगों को, जबकि वे जानते हैं कि यह अमानवता है, आखिर हमारा समाज भी तो कई रोगों से ग्रस्ति रहा है और है, तो उसे चलते रहने का हक है और उन्हें नहीं? …फिलहाल आपके सवाल का जवाब नहीं दे पाएंगे क्योंकि यह बहुत आवश्यक नहीं कि वचन दें ही।

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  5. "मेरी बहन, मैं वचन देता हूँ कि तुम्हे पढ़ने का, नौकरी करने का, मन पसंद साथी से प्यार और विवाह करने का मौका मिलेगा. वचन देता हूँ कि अगर तुम किसी वजह से पति के घर में सतायी जाओ तो तुम्हारा साथ दूँगा, संरक्षण दूँगा. कोई तुम पर ज़ोर लगाये कि बेटी पैदा करने के बजाया गर्भपात करो तो उसका विरोध करूँगा."

    काश...हर भाई, इस तरह का वचन अपनी बहन को दे...और उस पर अमल भी करे.
    '
    खामोश पानी' और 'पिंजर' मेरी पसंदीदा फिल्मे रही हैं...खासकर...पिंजर में जिस तरह भाई..अपनी बहन का बदला लेने के लिए परेशान रहता है...
    अलग सी पोस्ट...अच्छी लगी.

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  6. आदरणीय सुनील जी,

    मैंने स्वयं कई गलतियाँ कर दी हैं और शायद जाने-अनजाने में होती रहेंगी शब्दों आदि में। लेकिन मेरे कहे का बुरा नहीं मानेंगे। यहाँ भी ग्रसित और थोड़ गलत लिख दिया है।

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  7. चन्दन, अभी भी बहुत बार हिन्दी के शब्द ठीक से याद नहीं आते, आम जीवन में मैं हिन्दी अधिकतर चिट्ठा लिखने के लिखने के लिए ही उपयोग करता हूँ. इसलिए कोई गलती बताये, यह मेरी बहुत सहायता करता है. तुम्हारी टिप्पणी के बाद ही मैंने पृतपंथी को पितृपंथी ठीक किया! :)

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  8. हैप्पी राखी..... इस प्यारे त्योंहार की ढेर सारी बधाई ...
    --------------------


    बहुत सुंदर सार्थक विचार रखे आपने.... ... शुभकामनाएं ...डॉ मोनिका शर्मा

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  9. रिश्ता वही सोच नयी शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई

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  10. जिम्‍मेदार सोच की प्रभावी अभिव्‍यक्ति.
    'सति' का संशोधन सुझाव 'सती' और 'कोलिज' के बजाय 'कालेज या कॉलेज'.

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  11. राहुल जी, सराहना और वर्तनी की गलतियों को सुधारने के लिए धन्यवाद. सति को सती करना मेरे लिए आसान है लेकिन मेरे इतालवी कीबोर्ड से कॉ नहीं लिख सकता, उसे तो हमेशा कहीं से कापी पेस्ट ही करना पड़ेगा!

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  12. विचारशृंखला भली लगी। खानाबदोशों की कहानी कमोबेश एक सी ही है। समय बदला भी है बदलना भी है मगर ... खामोश पानी देखी थी, पिंजर अभी बची हुई है। राखी पर कुछ विचार यहाँ एक पोस्ट "भाई बहन का त्यौहार?" में रखे थे।

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  13. बदले हुए समय की बदली हुई सोच और प्रगतिशीलता के अनुरूप.

    यदि मीडिया और ब्लॉग जगत में अन्ना हजारे के समाचारों की एकरसता से ऊब गए हों तो कृपया मन को झकझोरने वाले मौलिक, विचारोत्तेजक आलेख हेतु पढ़ें
    अन्ना हजारे के बहाने ...... आत्म मंथन http://sachin-why-bharat-ratna.blogspot.com/2011/08/blog-post_24.html

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  14. प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
    आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के दिसम्बर माह में ०९--१० दिसम्बर (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संगोष्ठी को संपोषित किया जा सके इस सन्दर्भ में औपचारिकतायें पूरी की जा चुकी हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.

    संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (०९ -१० दिसम्बर२०११ ) संगोष्ठी में आप की सक्रीय सहभागिता जरूरी है. दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें . आलेख भेजने की अंतिम तारीख २५ सितम्बर २०११ है. मूल विषय है-''हिंदी ब्लागिंग: स्वरूप,व्याप्ति और संभावनाएं ''
    आप इस मूल विषय से जुड़कर अपनी सुविधा के अनुसार उप विषय चुन सकते हैं

    जैसे क़ि ----------------
    १- हिंदी ब्लागिंग का इतिहास

    २- हिंदी ब्लागिंग का प्रारंभिक स्वरूप

    ३- हिंदी ब्लागिंग और तकनीकी समस्याएँ
    ४-हिंदी ब्लागिंग और हिंदी साहित्य

    ५-हिंदी के प्रचार -प्रसार में हिंदी ब्लागिंग का योगदान

    ६-हिंदी अध्ययन -अध्यापन में ब्लागिंग क़ी उपयोगिता

    ७- हिंदी टंकण : समस्याएँ और निराकरण
    ८-हिंदी ब्लागिंग का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

    ९-हिंदी के साहित्यिक ब्लॉग
    १०-विज्ञानं और प्रोद्योगिकी से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

    ११- स्त्री विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

    १२-आदिवासी विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

    १३-दलित विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग
    १४- मीडिया और समाचारों से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग
    १५- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से धनोपार्जन

    १६-हिंदी ब्लागिंग से जुड़ने के तरीके
    १७-हिंदी ब्लागिंग का वर्तमान परिदृश्य
    १८- हिंदी ब्लागिंग का भविष्य

    १९-हिंदी के श्रेष्ठ ब्लागर

    २०-हिंदी तर विषयों से हिंदी ब्लागिंग का सम्बन्ध
    २१- विभिन्न साहित्यिक विधाओं से सम्बंधित हिंदी ब्लाग
    २२- हिंदी ब्लागिंग में सहायक तकनीकें
    २३- हिंदी ब्लागिंग और कॉपी राइट कानून

    २४- हिंदी ब्लागिंग और आलोचना
    २५-हिंदी ब्लागिंग और साइबर ला
    २६-हिंदी ब्लागिंग और आचार संहिता का प्रश्न
    २७-हिंदी ब्लागिंग के लिए निर्धारित मूल्यों क़ी आवश्यकता
    २८-हिंदी और भारतीय भाषाओं में ब्लागिंग का तुलनात्मक अध्ययन
    २९-अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी ब्लागिंग क़ी वर्तमान स्थिति

    ३०-हिंदी साहित्य और भाषा पर ब्लागिंग का प्रभाव

    ३१- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से रोजगार क़ी संभावनाएं
    ३२- हिंदी ब्लागिंग से सम्बंधित गजेट /स्वाफ्ट वयेर


    ३३- हिंदी ब्लाग्स पर उपलब्ध जानकारी कितनी विश्वसनीय ?

    ३४-हिंदी ब्लागिंग : एक प्रोद्योगिकी सापेक्ष विकास यात्रा

    ३५- डायरी विधा बनाम हिंदी ब्लागिंग

    ३६-हिंदी ब्लागिंग और व्यक्तिगत पत्रकारिता

    ३७-वेब पत्रकारिता में हिंदी ब्लागिंग का स्थान

    ३८- पत्रकारिता और ब्लागिंग का सम्बन्ध
    ३९- क्या ब्लागिंग को साहित्यिक विधा माना जा सकता है ?
    ४०-सामाजिक सरोकारों से जुड़े हिंदी ब्लाग

    ४१-हिंदी ब्लागिंग और प्रवासी भारतीय


    आप सभी के सहयोग क़ी आवश्यकता है . अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें



    डॉ. मनीष कुमार मिश्रा
    हिंदी विभाग के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय

    गांधारी विलेज , पडघा रोड
    कल्याण -पश्चिम, ,जिला-ठाणे
    pin.421301

    महाराष्ट्र
    mo-09324790726
    manishmuntazir@gmail.com
    http://www.onlinehindijournal.blogspot.com/
    http://kmagrawalcollege.org/

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  15. आदरणीय सुनील जी,
    शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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