अब तक की कहानी: जापानी याकूज़ा ताकानोरी हिन्दुस्तान आया है और वह जामुन बाबा को खोज रहा है क्योंकि उसे उनकी शक्ति वाली हरित तारा की मूर्ति चाहिये। उससे बचने के लिए जामुन बाबा मजूली द्वीप में जीवित समाधी ले लेते हैं। ताकानोरी उनके वृद्धाश्रम में अपने गुँडो के साथ आया है और वहाँ लोगों को जान से मार देने की धमकी दे कर उनसे बाबा के बारे में पूछता है। जामुन बाबा का शिष्य त्रिनेत्र गँगटोक के पास एक अनाथाश्रम चलाता है, जहाँ उसके साथ पाँच गुप्त-शक्ति वाले बच्चे और उसके मित्र की बहन आभा हैं। जब उन्हें ताकानोरी के बारे में पता चलता है तो जामुन बाबा को बचाने के लिए, त्रिनेत्र, आभा और पाँचों बच्चे गँगटोक से मजूली द्वीप की यात्रा पर निकलते हैं। इससे आगे पढ़िये ...
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अध्याय 13
असम यात्रा, 3 मार्च 2026
गार्गी ने आभा से पूछा, “दीदी, मणिपुर कैसी जगह है? आप इम्फाल में रहती हैं?”
“बहुत सुंदर है हमारा मणिपुर", आभा बोली, “लेकिन मैं इम्फाल में नहीं रहती। इम्फाल हमारी राजधानी है, बड़ा शहर है। उसके दक्षिण में एक झील है, लोकटक झील, वह बहुत सुंदर जगह है। मैं उस झील के पास एक गाँव में रहती हूँ, थमनापोकपी गाँव, वहाँ मेरे पति का पुराना घर है।"
तृप्ति बोली, “और आप के घर में कौन-कौन हैं?”
आभा की आँखें अचानक नम हो गयीं, धीरे से बोली, “बस मैं हूँ, मेरे ससुर हैं और हमारा कुत्ता है, डब्लयू। वैसे उसका नाम विलसन है लेकिन मेरे पति उसे डब्लयू बुलाते थे।"
त्री ने बात बदलने के लिए पूछा, “मणिपुर के अपने जीवन के बारे में कुछ और बताओ, हम वहाँ के बारे में कुछ नहीं जानते।"वह बोली, “हमारा परिवार मैतेई है। हमारे मैतेई लोगों में सात वंश हैं, हमारी भाषा में उन्हें सालाई कहते हैं, जैसे कि खुमान, मैरंग, अंगोम, वगैरा। मैं मैरंग सालाई में पैदा हुई थी और मेरे पति का परिवार खुमान सालाई की ओइनम जाति का है। खुमान को ऊँची सालाई मानते हैं। हम लोगों के प्राचीन पाराम्परिक विश्वास को सनमही कहते हैं क्योंकि हम सनमही देवता को बहुत मानते हैं, जोकि हमारे सृष्टि देवता सिदाबा मापू के बेटे हैं। चार-पाँच सौ साल पहले मणिपुर में वैष्णव धर्म आया और फ़ैल गया। इस तरह से हमारे परिवार में हम वैष्णव और सनमही दोनों को मानते हैं।"
त्री बोला, “मेरे गुरु जी कहते हैं कि हमारे देशों में धर्म ऐसे ही बनते-बदलते हैं, कि नयी सोचें आती हैं और पुरानी सोच में घुल-मिल जाती है, फ़िर समय के साथ दोनों के देवी-देवता भी घुल-मिल जाते हैं। उनके कोरिया देश में पहले सिन्दो धर्म था, जिसमें मानते हैं कि प्रकृति, पहाड़, नदी, आकाश, सब में आत्मा होती है। फ़िर जब वहाँ पर बौद्ध धर्म आया तो सिन्दो और बौद्ध, वह दोनों विचार घुल-मिल गये। वैसे तो मेरे गुरु जी बौद्ध भिक्षुक हैं पर भारत आने के बाद, वह शिव-भक्त भी बन गये।"
आभा बोली, “जब मैं चित्र बनाती हूँ, तो उसमें वैष्णव और सनमही देवी-देवता मिला कर बनाती हूँ।"
गार्गी ने पूछा, “सनमही देवता कैसे होते हैं?”
आभा मुस्करायी, बोली, “यह तो देवी-देवता पर निर्भर करता है। जैसे कि पखांगबा को भूरे रंग के सींग वाले हिरण के रूप में दिखाते हैं। एक बार सिदाबा मापू ने अपने बेटों, सनमही और पखांगबा को ब्रह्माँड का चक्कर लगाने के लिए कहा तो सनमही सचमुच पूरी दुनिया का चक्कर लगाने चला गया, जबकि पखांगबा ने पिता के सिंहासन का चक्कर लगाया और बोला कि यही मेरा ब्रह्माँड है।"
त्री बोला, “बिल्कुल यही कहानी शिव जी और उनके दोनों पुत्रों, कार्तिकेय और गणेश की भी है। उसमें कार्तिकेय सारी दुनिया का चक्कर लगाने निकल जाते हैं, जबकि गणेश जी केवल अपने माता-पिता की परिक्रमा करते हैं। गुरु जी भी यही कहते हैं कि जब हमारे धर्म मिलते हैं, तो उनकी कहानियाँ भी आपस में मिल जाती हैं।"
इसी तरह बातें करते हुए उनका रास्ता कट रहा था और वे लोग अलीपुर द्वार से हो कर भाटीबाड़ी पहुँच गये। वहाँ त्री ने एक ढाबे पर कार रोकी, बोला, “असम सीमा यहाँ से करीब तीस किलोमीटर आगे है, हम यहाँ पर थोड़ी देर ही रुकेंगे। अगर हो सके तो मैं आज रात तक जोरहाट पहुँचना चाहता हूँ।"
वहाँ से खाना खा कर वह लोग चलने ही वाले थे कि जगदीश बाबू का फोन आया, बोले, “त्री बेटा, तुम कहाँ पहुँचे हो? आज सुबह जामुन बाबा को खोजते हुए यहाँ कुछ बुरे आदमी आये हैं। उनका सरदार ताकानोरी नाम का एक जापानी है। उन्होंने हमारे साथ मार-पिटाई की और आज रात को वह बाबा की समाधी खोदने का प्लैन बना रहे हैं। जो चिट्ठी बाबा ने तुम्हारे लिए छोड़ी थी, वह उन्होंने ले ली है। वह जानते हैं कि तुम आ रहे हो और वे तुम्हारे आने की प्रतीक्षा में हैं।"
त्री बोला, “काका, आप हमारी चिंता नहीं करें और वह जो चाहते हैं उन्हें करने दीजिये, आप बीच में नहीं पड़िये, समझे? आप सावधान रहिये, और जब तक कोई एमरजैंसी न हो मुझे दोबारा टेलीफोन न करें।"
जब उनकी बात खत्म हुई तो रंगनाथ ने पूछा, “दादा, उन लोगों से लड़ने के लिए हमारा क्या प्लैन है?”
“ताकानोरी के पास गुप्त-शक्तियाँ हैं। एक तो अन्वेषण-किरण है जिससे वह आसपास लोगों की शक्ति-लहरों को खोज सकता है। उसकी और कौन सी शक्तियाँ हैं, हमें नहीं मालूम। सबसे पहले हमें यह समझने की कोशिश करनी है कि उसकी शक्तियाँ कौन सी हैं, लेकिन हमें होशियार रहना पड़ेगा क्योंकि वह अन्वेषण-किरण से हमें पहचान सकता है।"
“अन्वेषण-किरण कैसे काम करती है?” वसंत ने पूछा।
“हमारी कुछ शक्तियाँ हर समय जागृत रहती हैं, जैसे माधव की दृष्टि-शक्ति और रंगनाथ की श्रवण-शक्ति। लेकिन कुछ शक्तियों को ध्यान लगा कर जगाना पड़ता है, वह हमेशा काम नहीं करतीं, जैसे मेरी गिरगिट-शक्ति और गार्गी का अजगर-पाश। अन्वेषण-किरण भी हमेशा काम नहीं करती, उसे जगाना पड़ता है।"
गार्गी बोली, “जैसे मैं लोगों के दिमाग में घुस कर देख सकती हूँ कि वह क्या सोच रहे हैं, क्या अन्वेषण-किरण भी वैसी ही होती है?”
"मेरे विचार में तुम्हारी और उसकी शक्ति भिन्न हैं। तुम लोगों के विचार पढ़ सकती हो, जबकि अन्वेषण-किरण से शक्ति वाले लोगों को खोज सकते हैं, लेकिन वह उनके विचार नहीं पढ़ सकते", त्री बोला, “लेकिन मुझे इसका पक्का पता नहीं है, हमें इसकी जाँच करनी होगी।"
गार्गी बोली, “इसका मतलब है कि हमें अपनी शक्ति-लहरों को ढक कर रखना होगा।"
आभा बोली, “मेरी जीवों को आकर्षित करने वाली शक्ति ठीक से विकसित नहीं हुई है, लेकिन मैं सोते-सोते भी दूर से लोगों की बातें सुन सकती हूँ। अगर मैं किसी बहाने से उसके पास जाऊँ तो शायद वह मुझे न पहचाने और मैं उसकी बातें सुन सकती हूँ?”
त्री, रंगनाथ और गार्गी, तीनों एक साथ बोले, “हम आप को खतरे में नहीं डाल सकते। अगर उसने आप को पकड़ लिया तो?”
तृप्ति बोली, “मैं और माधव, आभा दीदी के बच्चे बन कर इनके साथ जा सकते हैं। मेरी शक्तियाँ भी ठीक से विकसित नहीं हुईं लेकिन जरूरत पड़ने पर मैं कुछ देर के लिए अपनी और इनकी शक्ति-लहरों को ढक सकती हूँ।"
गार्गी बोली, “लेकिन माधव की शक्तियाँ विकसित हैं, तुम्हारे लिए उसे छिपाना कठिन होगा।"
तृप्ति बोली, “तो मैं और आभा दीदी, हम दोनों माँ-बेटी बन कर थोड़ी देर के लिए उनके पास जायेंगी और उनकी बातें सुन कर वापस लौट आयेंगीं?”
त्री बोला, “नहीं, ताकानोरी मेरी प्रतीक्षा कर रहा है। उसे पता नहीं है कि हम सब के पास शक्तियाँ हैं। यह हमारा रहस्य ही हमारा गुप्त-शस्त्र है, उसे इसका पता नहीं चलना चाहिये।"
गार्गी बोली, “वहाँ जा कर हम कहाँ रहेंगे? अगर उसके आसपास रहेंगे तो वह हमें खोज नहीं लेगा?”
त्री बोला, “तुम उसकी चिंता नहीं करो, हमारे लिए वहाँ एक छिपने की जगह है। अब तुम सभी थोड़ी देर सोने की कोशिश करो। हम लोग वहाँ पर कल सुबह के तीन-चार बजे से पहले नहीं पहुँचेगे, और वहाँ हमें लड़ने के लिए सतर्क और तैयार रहना है, इसलिए तुम इस समय जितना आराम करोगे उतना बेहतर होगा।"
वसंत बोला, “दादा, उन्होंने टेलीफोन पर कहा था कि गुँडे आज रात को गुरु जी की समाधी को खोदेंगे, हम उसे कैसे रोकेंगे?”
“तुम उसकी चिंता नहीं करो", त्री मुस्कराया, “गुरु जी में बहुत शक्ति है, वह अपनी रक्षा खुद कर सकते हैं।"
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अगला अध्याय बृहस्पतिवार 16 जुलाई से पढ़ सकते हैं
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"जो न कह सके" के आलेख पढ़ने एवं टिप्पणी के लिए डॉ. सुनील दीपक की ओर से आप का हार्दिक धन्यवाद.