अब तक की कहानी: ताकानोरी जामुन बाबा को खोज रहा है, वह उनकी
मूर्ति चाहता है। उससे बचने के लिए बाबा समाधी ले लेते हैं। ताकानोरी उनकी
समाधी को खोदने की कोशिश करता है लेकिन सफल नहीं होता। उधर, बाबा का शिष्य
त्रिनेत्र पाँच गुप्त-शक्ति वाले बच्चों और आभा के साथ मजूली पहुँचा है।
त्री, रंगा और गार्गी बाबा के आश्रम आते हैं। पीछे से ताकानोरी आभा, वसंत
और तृप्ति को उठा कर नारायणपुर ले जाता है और रास्ते में उसे आभा की शक्ति का खतरा समझ में आता है। इसके आगे पढ़िये ...
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अध्याय 20
नारायणपुर, असम, 4 मार्च 2026, रात
नारायणपुर में ताकानोरी का घर, घंटाघर के सामने से बेलागुड़ी सत्र जाने वाली सड़क पर है। दो मंजिला घर में सात कमरे हैं, चार नीचे और तीन ऊपर। ओरी अकेला ऊपर रहता है और सारे गार्ड नीचे।
घर पहुँच कर उसने उन तीनों को नीचे के एक कमरे में बंद करवा दिया। फ़िर गार्ड से कहा कि वह आभा के लिए बाथरूम में साबुन, शैम्पू, वगैरा रख दे।
जब गार्ड कमरे से गये और वह तीनों वहाँ अकेले हुए, तो खिड़की के पास लगे पेड़ों के माध्यम से, वसंत ने त्री को संदेश भेजा, और उसे बताया कि वह लोग नारायणपुर में ताकानोरी के घर पर ठहरे हैं और सभी ठीक-ठाक हैं।
घर लौट कर ओरी नहाने गया और बहुत देर तक अपने सुडोल और गठी हुई माँसपेशियों वाले शरीर को शीशे में देख कर निहारता रहा। वह अपने आप से बहुत खुश महसूस कर रहा था कि उसने त्रिनेत्र के साथियों को पकड़ लिया है। उसकी पीठ वाले टैटू सचमुच डराने वाले थे, वहाँ पर एक लाल आँखों वाले हँसते हुए कंकाल का चेहरा बना है जिसके मुख से लाल आग निकल रही है और जिसके चारों ओर नारंगी रंग की मछलियाँ बनी हैं। अंत में वह सिल्क का ड्रैसिन्ग गाउन पहन कर बाहर निकल कर आया, सोच रहा था कि अब वह मूर्ति उसे अवश्य मिल जायेगी।
नीचे जा कर उसने रसोई में काम करने वाली को हटाया और खुद रात के खाने के लिए रामेन सूप बनाया और फ़िर, गार्ड से अपने कमरे में दो लोगों के लिए मेज़ पर खाना लगाने के लिए कहा। मेज़ के बीच में लाल रंग की मोमबत्ती जल रही थी। उसे लगा कि कमरे का वातावरण बहुत अच्छा बना है। तब उसने एक गार्ड से आभा को ऊपर लाने के लिए कहा।
जब ताकानोरी के गार्ड ने उसे साहब के साथ खाना खाने जाने के लिए तैयार होने के लिए कहा था, तो आभा समझ गयी थी कि वह क्या सोच रहा है। उसने निश्चय किया कि वह उसके साथ ऐसा व्यवहार करेगी जिससे उसे लगे कि वह उसे अच्छा लगता है, ताकि वह उससे खुल कर बातें करे।
जब गार्ड उसे बुलाने आया तो वह बोली, “बच्चे भी भूखे हैं, पहले इनके लिए खाना लाओ, फ़िर तुम्हारे साहब से मिलने जाऊँगी।"
गार्ड ने कार में बैल का हमला देखा था, वह मन ही मन में आभा से डर रहा था, सोच रहा था कि वह कोई चुड़ैल या जादुगरनी है। वह भाग कर रसोई से बच्चों के लिए खाना ले आया, तब वह कमरे से निकली। गार्ड ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो उसने उसे झटका कर दूर कर दिया और गर्व से सिर उठा कर सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर गयी। उसने कोई श्रंगार नहीं किया था लेकिन उसके तीखे नाक-नक्श बहुत सुंदर लग रहे थे।
जब उसने ओरी के कमरे में सजी हुई मेज़ देखी तो मुस्करा कर बोली, “मेरी इतनी खातिरदारी क्यों हो रही है, क्या मुझसे जबरदस्ती करने का प्लैन बनाया है?”
उसकी बात सुन कर ओरी गुस्सा हो गया, बोला, “मुझे ऐरा-गेरा समझा है क्या? मैं समुराई खानदान से हूँ, मैंने आज कभी किसी औरत से जबरदस्ती नहीं की, औरतें खुद मेरे पास आती हैं और मेरे आगे-पीछे घूमती हैं।"
आभा मुस्करायी, कुछ कहा नहीं, कमरे में इधर-उधर देखा। एक ओर ताकानोरी का बिस्तर लगा था, उसके पास छोटी सी मेज़ पर एक बूढे जापानी की फ्रैम में लगी तस्वीर रखी थी। एक ओर खिड़की के पास एक दूसरी मेज़ पर हाथ में धनुष-बाण लिए हुए, घोड़े पर सवार जापानी पोशाक पहने हुए एक योद्धा की तस्वीर थी, जिसके सामने कुछ फ़ूल रखे थे और एक अगरबत्ती जल रही थी। वह किसी आराध्य-देवता का मन्दिर जैसा लग रहा था।
“वह बूढ़े व्यक्ति कौन हैं? तुम्हारे पिता हैं?”, उसने पूछा।
ओरी तस्वीर की ओर मुड़ कर झुका और उसे नमन किया, बोला, “वह यामागुचि सान हैं, उन्होंने मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया है, मैं उनका सेवक हूँ, वह पिता समान मेरे वंदनीय हैं।"
“और वह घुड़सवार यौद्धा?”
ताकानोरी ने उस तस्वीर की ओर भी झुक कर नमन किया, बोला, “वह हाचिमनतारो योशिए हैं, प्राचीन जापान के बहुत बड़े यौद्धा थे। हम उन्हें हाचिमन-शिन का अवतार मानते हैं। हमारे शिंतो धर्म में हाचिमन-शिन साहस और युद्ध के देवता हैं।"
“उस तस्वीर के दाहिनी ओर जापानी भाषा में कुछ लिखा हुआ भी है, उसका क्या अर्थ है?”
ओरी उसके प्रश्नों से बहुत खुश हुआ, उसे लगा कि वह पढ़ी-लिखी सुसंस्कृत युवती है, जो जापानी सभ्यता के बारे में जानना चाहती है। जब से वह भारत आया है, उसके कमरे में आने वाली किसी युवती ने अभी तक उसकी तस्वीरों में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। वह बोला, “एक बार हाचिमनतारो एक पहाड़ से उतर कर नीचे आ रहे थे, उनके रास्ते के दोनों ओर चैर्री के पेड़ लगे थे, तब उन्होंने एक कविता कही, ‘अगर मत-आओ द्वार पर हवाएँ नहीं चलीं, तो राह पर चैर्री के फ़ूल क्यों बिखरे हैं'। उस तस्वीर पर यही शब्द लिखे हैं।"
“मत-आओ द्वार का क्या मतलब?”
“वह द्वार जहाँ से यौद्धा को नहीं जाना चाहिये। इसका मतलब है कि कवि पूछ रहा है कि अगर मुझे यहाँ नहीं आना चाहिये था तो फ़िर मेरी राह में यह फ़ूल क्यों बिखेरे?"
उस कविता के शब्द आभा को सचमुच अच्छे लगे। उसे लगा कि ओरी जैसा भी है, उसके दिल में अपने अग्रजों और गुरुओं के प्रति आदर और कविता की जगह भी है।
ओरी उसके चेहरे के भाव से समझ गया कि उसे यह कविता अच्छी लगी है, खुश हो कर बोला, “आओ, रामेन सूप ठंडा हो रहा है।"
वह खाना खाने के लिए कुर्सी पर बैठी तो पूछा, “यह रामेन सूप क्या कोई जापानी भोजन है? यहाँ पर कैसे मिला?”
“मैं इन्हें जापान से लाया हूँ। यह गेहूँ की मोटी नूडल्स हैं जिसमें कन्साइ मिला कर बनाते हैं", उसने कहा।
वह उससे पूछना चाहती थी कि कन्साइ क्या होता है, लेकिन उससे पहले, ओरी बात बदलते हुए बोला, “तुम्हारी गुप्त-शक्ति जीव-जन्तुओं को तुम्हारी ओर आकर्षित करती है और वह तुम्हारी रक्षा करते हैं। इस शक्ति के बारे में कुछ बताओ?”
“बचपन से मुझे घायल पशु-पक्षियों को बचाना अच्छा लगता था, और घायल जीव-जन्तु मेरे पास बहुत आसानी से आ जाते थे", वह सोचते हुए बोली, “लेकिन तब मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि इसमें मेरी कोई विशेष शक्ति है। मैं मैइतै जनजाति की हूँ, हम लोग मणिपुर में रहते हैं। जब छोटी थी तो मैं पशु-पक्षियों की डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन उसके लिए कॉलेज हमारे गाँव से दूर था, उस पढ़ाई के लिए मुझे इम्फाल जा कर रहना पड़ता। उसके लिए मेरे पिता नहीं माने और स्कूल के बाद मेरा विवाह हो गया। मेरे पति विवेक का दो साल पहले एक बम विस्फोट में देहांत हो गया। उसके बाद से यह शक्ति, जिसे तुम मेरी गुप्त-शक्ति कहते हो, धीरे-धीरे वह कुछ सामने आई है।"
उसकी बात सुन कर ओरी सोच में पड़ गया, बोला, “यानि, तुम्हारे पति की मृत्यु के सदमें ने तुम्हारे भीतर सोयी गुप्त-शक्ति को जगा दिया?”
आभा की आँखें भीग गयीं, आँसू पोंछते हुए बोली, “जिस विस्फोट ने विवेक की जान ली थी, उसी में मेरी बेटी मयूरी भी मुझसे छिन गयी। बेटी और पति को एक साथ खोना, इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है?”
ओरी ने उसके मस्तिष्क में झाँका, इस बार आभा ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। वहाँ उसे केवल दुख और उदासी दिख रहे थे, यानि वह सच बोल रही है। वह बोला, “जापान में हमारे यामागुचि सान को उस कोरियाई भिक्षुक की तलाश थी, जिसे तुम लोग जामुन बाबा कहते हो। उन्हें उनकी हरिताश्म पत्थर की बनी देवी तारा की प्रतिमा चाहिये, जिसे बाबा कोरिया से ले कर आये थे। तुम इस बारे में क्या जानती हो?”
“मैं केवल इतना जाती हूँ कि बाबा त्रिनेत्र के गुरु थे, मैं उनसे कभी नहीं मिली। मैं त्रिनेत्र से भी कुछ दिन पहले ही मिली हूँ, वह मेरे भाई का दोस्त है। मुझे उस मृ्र्ति के बारे में कुछ नहीं मालूम।"
ओरी थोड़ी देर तक सोचता रहा, फ़िर बोला, “तुम मुझे अच्छी लगती हो। क्या तुम आज रात को यहाँ मेरे साथ रुकना चाहती हो? मैं तुम पर कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा, लेकिन अगर तुम स्वेच्छा से रुको, तो मुझे अच्छा लगेगा।"
आभा ने उसे तुरंत उत्तर नहीं दिया, कुछ देर तक सोचती रही, फ़िर लम्बी साँस ले कर बोली, “मैं सोचती थी कि तुम गुँडे और खूनी हो, पर अब समझी हूँ कि तुम जैसे बाहर से लगते हो, वैसे नहीं हो। तुम दिलचस्प व्यक्ति हो, लेकिन मैं अभी किसी अन्य पुरुष से प्रेम करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हूँ।"
ओरी ने अपने गार्ड को बुलाया और उसे आभा को नीचे बच्चों के पास ले जाने के लिए कहा, बोला, “मुझे तुम तीनों के बदले वह तारा माँ की प्रतिमा चाहिये। अगर त्रिनेत्र तुमसे सम्पर्क करे तो उसे कहना कि अगर वह प्रतिमा मुझे नहीं मिलेगी तो मैं तुम तीनों को मार दूँगा।"
आभा ने उसकी ओर देखा, कुछ नहीं बोली।
वह मुस्कराया, बोला, “मैंने तुमसे कहा कि तुम मुझे अच्छी लगती हो, वह झूठ नहीं था। लेकिन मेरा धर्म अपने स्वामी की आज्ञा का पालन करना है। अगर तुम्हारी हत्या से मुझे वह मूर्ति मिलेगी तो मैं तुम्हारी गर्दन काटने से एक क्षण के लिए भी नहीं हिचकिचाऊँगा, तुम यह बात समझती हो न?”
उसकी आँखों में कुछ था, जिसे वह समझ नहीं पायी कि वह सच कह रहा है या झूठी धमकी दे रहा है।
वह मुस्करा कर बोली, “जापानी रामेन का खाना खिलाने के लिए धन्यवाद। रामेन अच्छी हैं, पर मुझे खाने में बिना मिर्च-मसाले के अच्छा नहीं लगता। मेरे ख्याल में तुम्हारी रामेन में थोड़ी सी लाल मिर्च मिल जायेगी तो और भी बढ़िया लगेगी।"
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अगला अध्याय सोमवार 10 अगस्त 2026 को पढ़ सकते हैं।
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"जो न कह सके" के आलेख पढ़ने एवं टिप्पणी के लिए डॉ. सुनील दीपक की ओर से आप का हार्दिक धन्यवाद.