गुरुवार, जनवरी 18, 2007

मैसूर का बाघ

बचपन में विद्यालय में मैसूर के बाघ, टीपू सुलतान की कहानी पढ़ी थी कि कैसे उसने अँग्रेजी शासन से लड़ाई की. कुछ वर्ष पहले, मैसूर के पास श्रीरंगापट्नम में उनका महल और मकबरा भी देखा. पिछले महीने, दिसम्बर में जब बंगलूरु में था तो उनका राज भवन भी देखने गया और फ़िर वर्ष के अंत में, अँग्रेज़ी पत्रिका "द वीक" में टीपू के बारे में अँग्रेज़ी मूल के लेखक विलियम डारलिमपल का एक लेख भी पढ़ा, कि कैसे अँग्रेज़ी शासकों ने उनके विरुद्ध आरोप लगाये और इतिहास में उनकी गलत छवि बनाई.

विकिपीडिया टीपू की जनछवि से जुड़ी विभिन्न मान्यताओं के बारे में बताता है, कि अधिकतर हिंदू बहुल्य वाले भाग में टीपू को मुस्लिम शासक होने की वजह से अपनी वैधता स्थापित करने की कठिनाई थी. एक तरफ़ वह स्वयं को धर्मपरायण मुसलमान दिखाना चाहते थे पर साथ ही संतुलित विचारों वाले ताकि अपनी प्रजा से सही नाता बना सकते. उनकी धार्मिक धरोहर के विषय में उपमहाद्वीप में बहुत विवादग्रस्त है. पाकिस्तान में कुछ गुटों का दावा है कि वह घाज़ी यानि धर्म के लिए लड़ने वाले बड़े यौद्धा थे और भारत में कुछ गुट कहते हैं कि उन्होंने बहुत से हिंदुओं को मारा. कई इतिहासकारों का कहना है कि टीपू ने हिंदुओं तथा ईसाईयों के विरुद्ध बहुत से काम किये थे और पूरे भारत में एक मुस्लिम राज्य की स्थापना करने का सपना देखते थे.

विलियम डारलिमपल का लेख टीपू पर अँग्रेज़ी हमले की तुलना, अमरीका के ईराक पर हमले से करते हैं. एतिहासिक दस्तावेज़ों के अध्ययन से वह यह निष्कर्ष निकालते हैं कि सन 1790 के आसपास अँग्रेज़ी शासन रूढ़िवादियों के हाथ में था जो अपने देश को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत देखना चाहते थे, फ्राँस के बहुत विरुद्ध थे और अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए उन सभी शासकों को हटाना चाहते थे जिनसे उन्हें कोई खतरा हो सकता था.

अँग्रेज़ी शासन को जिन लोगों से खतरा हो सकता था उनमें टीपू का नाम काफ़ी ऊपर था. उसने अपने शासित हिस्से में सड़के आदि बनवायीं थी, शासन के स्पष्ट नियम बनवाये थे, सेना के लिए फ्राँस से नयी बंदूकें और हथियार बनवाये थे. अँग्रेज़ो़ को लगा कि अगर टीपू इस तरह अपने शासन को सुदृढ़ करता रहा तो बाद में उसे हराना और भी कठिन हो जायेगा. इसलिए टीपू पर हमले का बहाना ढूँढ़ने के लिए उन्होंने टीपू के विरुद्ध मीडिया अभियान शुरु किया कुछ वैसे ही जैसे अमरीका ने सद्दाम हुसैन के विरुद्ध किया था. वह कहने लगे कि टीपू धार्मिक कट्टरवादी था, हिंदुओं और ईसाईयों को मार रहा था, उसे हटाना बहुत जरुरी था और इस तरह टीपू पर युद्ध किया.

डारलिमपल का कहना है कि दस्तावेज़ों से टीपू की जो छवि निकलती है वह उस तरह की नहीं हैं जैसी अंग्रेज़ी इतिहासकारों द्वारा बनाई गयी बल्कि और जटिल है. शासक के रुप में टीपू नये विचारों वाला, जनप्रगति और शासन दृढ़ बनाने, नयी तकनीकों को अपनाने वाला था. उसने पश्चिमों देशों के सामाजिक संगठन को देख कर उससे सीख ली और वैसी ही नीतियाँ अपने ही शासन में चलानी चाहीं. उनके निजि पुस्तकालय में 2000 से अधिक किताबें थीं, न केवल धर्म, सूफ़ी आदि के बारे में बल्कि इतिहास, गणित, नक्षत्रविज्ञान जैसे विषयों पर भी. वह कला को प्रोत्साहन देते थे. एक तरफ़ युद्ध में जीते प्राँतों में उन्होंने हिंदू मंदिर नष्ट करवाये और लोगों को जबरदस्ती धर्म बदलने के लिए मजबूर करवाया, दूसरी ओर अपने शासित प्राँत भाग में हिंदू मंदिरों को सरकारी सुरक्षा मिलती थी और सरकारी दान भी. उन्होंने कई मंदिरों को क्वार्टज़ाईट के शिवलिंगों का दान किया. श्रृंगेरी मंदिर जो एक मराठा युद्ध में नष्ट हुआ था, उसे दोबारा बनवाने के लिए दान दिया.

नीचे की तस्वीरों में टीपू का बंगलूरु का महल.





6 टिप्‍पणियां:

  1. कई नये तथ्य जानने को मिले।क्या 'द वीक ' वाला लेख विकी पर नहीं है?

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  2. I hv read lots of history book but the historian said Tipu was a Only Tiger of India...n he was...beautiful snap!!

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  3. टीपु सुल्तान से संबधीत एक तस्वीर नासा मे भी लगी है।
    टिपु सुल्तान विश्व का वह पहला शाशक था जिसने युद्ध मे राकेट का प्रयोग किया था। इसे देखकर ही जर्मनो मे मिसाइल तकनिकी का विकास किया था।

    टिपु सुल्तान और अंग्रजो के युद्ध मे जिस तरह राकेट का प्रयोग हुआ था उसकी एक तस्वीर नासा मे लगी हुयी है।

    राष्ट्र्पति ए पी जी अबुल कलाम ने अपनी आत्मकथा विंग्स आफ फायर मे इसका उल्लेख भी किया है !

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  4. "द वीक" के जिस अंक में डारलिमपल का लेख छपा था वह दिसम्बर २००६ के अंत में द वीक की २५वीं वर्षगाँठ का विषेश अंक था.

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  5. Dear Ashish, I also read that the Missiles were invented during Tipu's regime. He was known as technology freak. After he was defeated in the third war (He defeated Englishmen in first two wars), Englishmen exported all his missiles to England for further study and research. Surprisingly, most of us don't know or care about this fact.

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  6. इन तीनो भाशाओं में आपकी दक्षता और प्रवीनता देख कर विस्मित हूँ |

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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