परिचय

"जो न कह सके" और मेरे बारे में जानने के लिए इस पृष्ठ पर आने के लिए धन्यवाद।




मैं डॉ. सुनील दीपक हूँ, भारत में पैदा हुआ और भारत में ही मैंने चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की। मैं इटली के उत्तरपूर्व में एक छोटे से पहाड़ी शहर में रहता हूँ और हर वर्ष कुछ मास भारत में बिताने की कोशिश करता हूँ।

प्रोफेशनल जीवन


मेरा अधिकाँश जीवन इटली में रहते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य से सम्बंधित कार्यक्रमों में काम करते हुए गुज़रा है। मैंने विषेश रूप में कुष्ठ रोग, समुदायिक स्वास्थ्य तथा विकलाँगता के क्षेत्रों में काम किया है। मैंने संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न संस्थाओं, विषेशकर विश्व स्वास्थ्य संस्थान (World Health Organisation - WHO) के लिए भी वर्षों काम किया है।

कुछ वर्ष पहले सेवा निवृत होने के बाद मैंने करीब दो वर्षों तक उत्तरपूर्वी भारत में एक स्वयंसेवी संस्था के लिए काम किया। आजकल, मेरा अधिकतर समय घर पर पढ़ने, लिखने में गुज़रता है, साथ ही मैं निशुल्क स्वयंसेवा के कार्यक्रमों से जुड़ा हूँ जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थियों की सहायता। पिछले दशक में मैंने विभिन्न देशों में शोषित समुदायों के साथ मिल कर "बँधनमुक्ति शोध" (Emancipatory research) के क्षेत्र में भी काम किया है।

आप अगर मेरे चिकित्सा तथा शोषित समुदायों से जुड़े काम के बारे में अधिक जानना चाहते थे तो मेरे प्रोफेशनल आलेख, रिपोर्ट और किताबें निशुल्क डाऊनलोड कर सकते हैं (पीडीएफ़ फॉरमेट में, अधिकाँश अंग्रेज़ी में हैं)।

मेरी इच्छा है कि अगले वर्षों में भारत में जातिभेद से पीड़ित सबसे अधिक वंचित समुदायों की संस्थाओं के सहयोग से "बंधनमुक्ति शोध"के क्षेत्र में भी काम करूँ। अगर आप ऐसी किसी संस्था या समुदाय से जुड़े हैं और इसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो मुझसे सम्पर्क कीजिये। मेरा ईमेल है - sunil.deepak(at)gmail.com (ईमेल के पते में "(at)" के बदले में "@" डालें)

इस ब्लाग के बारे में


"जो न कह सके" ब्लाग २००५ में शुरु किया गया था जब इंटरनेट पर हिंदी में लिखने वाले कम थे और हम सब ब्लागर एक दूसरे को जानते थे। भारत छोड़ने के बाद से मेरा हिंदी से नाता ही टूट गया था, इस चिट्ठे की सहायता से मुझे वह नाता दोबारा जोड़ने का मौका मिला। उस समय के बहुत से ब्लागरों की सहायता यह सब संभव हुआ था।

इस ब्लाग का फेसबुक पृष्ठ है,जहाँ से आप मेरे नये आलेखों के बारे में सूचना पा सकते हैं।

मैं अंग्रेज़ी और इतालवी भाषाओं में भी ब्लाग लिखता हूँ।

आप चाहें तो मुझसे फेसबुक, टविटर, या इँस्टाग्राम से भी जुड़ सकते हैं।

अंत में, यदि आप मेरे आलेखों को अपने अखबार या पत्रिका में छापना चाहते हैं तो खुशी से छापिये। अगर आप उसके बारे में मुझे सूचना देंगे तो मैं आप का आभारी होऊँगा। और अगर आप को छापने के लिए मेरी तस्वीरों की ऊँचे रिज़ोल्यूशन में आवश्यकता है तो मुझसे सम्पर्क कीजिये।

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