अब तक की कहानी: जापानी याकूज़ा ताकानोरी हिन्दुस्तान आया है और जामुन बाबा को खोज रहा है, वह उनकी शक्तिदायिनी हरित तारा की मूर्ति चुराना चाहता है। उससे बचने के लिए जामुन बाबा मजूली द्वीप में जीवित समाधी ले लेते हैं। ताकानोरी उनके वृद्धाश्रम में अपने गुँडो के साथ आ कर, लोगों को जान से मारने की धमकी देता है और वृद्धाश्रम में बाबा की समाधी को खोदने की कोशिश करता है लेकिन सफल नहीं होता। उधर, जामुन बाबा का शिष्य त्रिनेत्र गँगटोक के पास एक अनाथाश्रम चलाता है, जहाँ उसके साथ पाँच गुप्त-शक्ति वाले बच्चे और उसके मित्र की बहन आभा हैं। जब उन्हें ताकानोरी के बारे में पता चलता है तो जामुन बाबा को बचाने के लिए, वे गँगटोक से मजूली द्वीप के लिए निकल पड़े हैं। इसके आगे पढ़िये ...
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अध्याय 15
मजूली द्वीप की यात्रा, असम, 3-4 मार्च 2026
रात के दस बजे अचानक त्री के मोबाइल की घंटी बजी।
“काका, क्या हुआ?” उसने पूछा।
जगदीश बाबू ने पूछा, “तुम लोग कहाँ हो और यहाँ कब पहुँच रहे हो?”
“क्यों? हम लोग कोहोरा के पास हैं, आज रात को मरियानी पहुँच कर वहीं आसपास कहीं रुक जायेंगे, बहुत थक गये हैं। हम कल मजूली की फैरी पकड़ेंगे, दोपहर तक आप के यहाँ पहुँच जायेंगे।”
जगदीश बाबू ने उसे ताकानोरी की समाधी को खुदवाने की कोशिशों के बारे में बताया, बोले, “वह अपने कम्प्यूटर वाले लड़के सोमचाई को यहाँ छोड़ कर गया है। यह सोमचाई बुरा आदमी नहीं लगता। ताकानोरी कह रहा था कि वह नारायणपुर वापस जा रहा है लेकिन मेरे विचार में वह झूठ बोल रहा था, मुझे डर है कि वह यहीं कहीं, हमारे आसपास ही छुपा हुआ है और जैसे ही तुम यहाँ पहुँचोगे, वह तुम्हें पकड़ लेगा।"त्री बोला, “आप चिंता नहीं कीजिये काका, वहाँ आने से पहले मैं आप को खबर कर दूँगा।"
उसके साथ बैठी आभा और पीछे बैठे बच्चे, सभी सो रहे थे लेकिन फोन की आवाज़ से आभा जाग गयी। जब उसने फोन बंद किया तो
वह धीरे से बोली, “वह जापानी नारायणपुर क्यों चला गया?”
त्री बोला, “मेरा ख्याल है कि उन्होंने जगदीश काका के मोबाइल में स्पाईवेयर लगाया है, जिससे वह लोग देख सकते हैं कि वह किसे फोन कर रहे हैं और उनकी बातें भी सुन सकते हैं। इसलिए सबसे पहले हमें इस मोबाइल के सिम-कार्ड को बदलना है।" उसने अपनी जेब से एक छोटा लिफाफा निकाल कर आभा की ओर बढ़ाया, बोला, “इसमें मोबाइल खोलने वाला पिन है और एक नया सिम-कार्ड है। उसे बदल दो और पुराने सिम को खिड़की से बाहर फ़ैंक दो।"
आभा ने मोबाइल को लिया और उसका सिम कार्ड बदलने लगी, तो त्री बोला, “मैंने काका से झूठ बोला है। हम लोग मरियानी नहीं रुकेंगे, आज रात को ही मजूली पहुँच जायेंगे। मेरे ख्याल में वह जापानी वहीं आसपास छुपा हुआ होगा और अपनी अन्वेषण-किरण से हमें खोजेगा, लेकिन हम उसके लिए तैयार होंगे।"
वह बोली, “तुम आज सुबह से लगातार गाड़ी चला रहे हो, हम लोग रास्ते में खाने के लिए भी बहुत थोड़ी देर के लिए रुके। हमने तो कुछ आराम किया है लेकिन तुम, क्या तुम्हें आराम भी बिल्कुल आवश्यकता नहीं है?”
त्री मुस्कराया लेकिन कुछ नहीं बोला।
वह लोग रात को साढ़े ग्यारह बजे के करीब गोसाईंगाँव के घाट पर पहुँचे। बच्चों को जगाने में कुछ समय लगा, त्री ने उन्हें पानी की बोतल दी और सबसे आँखो पर पानी के छींटें मारने के लिए कहा। कार को पार्किन्ग में छोड़ कर वह आगे पैदल ही बढ़े।
गुरु जी का पुराना नाववाला मछुआरा फरीद, अपनी नाव के साथ अँधेरे में उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। जैसा उन्होंने पहले से निश्चित किया था, यह बताने के लिए कि वहाँ कोई खतरा नहीं है, वह मिसिन्ग भाषा में एक गीत गा रहा था, “ओकोल कापे दूदोने नो, केराद कमाइ मेमोदाग ...”।
उसके गीत की आवाज़ सुनते हुए, त्री उन्हें वहाँ तक ले आया। फरीद की नाव घाट पर तैयार खड़ी थी, और घाट खाली था। उसने उन्हें नाव में बिठाया और बिना आवाज़ किये, धीरे-धीरे चप्पु चलाते हुए, उसे ब्रह्मपुत्र नदी की धारा के बीच में ले आया।
आभा ने फुसफुसा कर त्री से पूछा, “यह आदमी ऐसे ही अँधेरे में नाव कैसे चलायेगा? कहीं फँस गये तो?”
त्री ने धीरे से उसका हाथ दबाया, कुछ बोला नहीं। गोसाईंगाँव से कमलाबाड़ी का फैरी टर्मिनल करीब दस किलोमीटर दूर था। त्री थका हुआ था, जल्दी ही आँखें बंद करके बैठे-बैठे सो गया। अँधेरे में बच्चे भी दोबारा सो गये। केवल आभा डरी हुई थी, वह जाग रही थी।
वह एक बार पहले भी मजूली आयी थी, जानती थी कि वहाँ नदी के बीच में बहुत सारे द्वीप हैं, जिनके आसपास पानी की गहराई कम हो जाती है और वहाँ पर नाव फँस सकती है। लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि नाव वाला फरीद वहीं पैदा हुआ है और बचपन से उसने वहाँ नाव चलाई है, वह रास्ते को अच्छी तरह से जानता है।
उन्हें मजूली पहुँचने में करीब तीन घंटे लगे। उन्हें कमलाबाड़ी उतार कर फरीद वहाँ रुका नहीं, त्री को नमस्कार करके तुरंत चला गया।
त्री ने गार्गी से कहा, “हमारी सबकी शक्ति-लहरों को ढक दो।"
गार्गी ने तुरंत सबकी शक्ति लहर को ढका, फ़िर बोली, “दादा, हम बहुत लोग हैं, मैं थक जाऊँगी, अधिक देर नहीं कर पाऊँगी।"
त्री बोला, “हमें थोड़ी देर के लिए ही चाहिये, केवल दस मिनट की बात है।"
वह उन्हें घाट से कुछ दूर बामुनगाँव नामघर की ओर ले गया। नामघर के पीछे दो-तीन घर थे, उनमें से एक घर के दरवाज़े पर उसने तीन बार घंटी बजायी तो दरवाज़ा खुला। भीतर साड़ी पहने हुए एक लड़की खड़ी थी, उसने त्री को हाथ जोड़ कर नमस्ते की लेकिन कुछ नहीं बोली और उन्हें सीधा एक कोठरी में ले गयी, जहाँ पर नीचे जाती हुई सीढ़ियाँ थीं। उसने उन्हें नीचे जाने का इशारा किया।
करीब चालिस सीढ़ियाँ थीं, नीचे जाते हुए त्री ने गार्गी से कहा, “अब हमारी शक्ति-लहरों को ढकने की आवश्यकता नहीं है।"
आभा ने पूछा, “ज़मीन की सतह के नीचे से शक्ति-लहर का पता नहीं चलता?” तो गार्गी ने सिर हिला कर हामी भरी।
नीचे तहखाने में बिजली लगी थी। एक ओर गुसलखाना और टॉयलेट बने थे, दूसरी ओर रसोई थी और बीच में दीवार के साथ तीन-टायर वाले रेलगाड़ी के डिब्बे जैसे बिस्तर लगे थे। बाकी सबको आराम करने के लिए कह कर, त्री, वसंत और माधव, वह तीनों कुछ सीढ़ियाँ चढ़ कर आधे रास्ते तक ऊपर आये। उन्हें ऊपर जाते देख कर आभा भी उनके पीछे ऊपर आयी।
वहाँ त्री ने वसंत से कहा, “कोशिश करके देखो कि क्या तुम बाहर के पेड़-पत्तों से बात कर सकते हो?”
वसंत ने एक मिनट आँखें बंद की, फ़िर सिर हिला कर मना किया, तो वह लोग कुछ अन्य सीढ़ियाँ चढ़ कर थोड़ा और ऊपर आये। वहाँ पहुँच कर वसंत ने फ़िर से आँखें बंद कीं और त्री से बोला, “दादा, यहाँ से मैं उनसे बात कर सकता हूँ।"
"पूछो कि मजूली में और हमारे आसपास कहीं पर कोई शक्ति-लहर दिख रही है?”
वसंत ने आँखें बंद कर लीं, कुछ देर के बाद आँखें खोल कर बोला, “वह कहते हैं कि दक्षिण में जहाँ पर मजूली द्वीप समाप्त होता है,
वहाँ पर नदी के दूसरी ओर छह-सात किलोमीटर दूर जा कर एक शक्ति-लहर दिखती है।"
त्री ने थोड़ी देर तक सोचा, फ़िर माधव को घुमाया और कहा, “सामने उस दिशा में देखो, यहाँ से करीब तीस किलोमीटर दूर, तुम्हें वहाँ कोई शक्ति-लहर महसूस होती है?”
माधव ने भी कुछ क्षणों के लिए आँखें बंद की फ़िर बोला, “नहीं दादा, मुझे ऐसा कुछ नहीं दिखा।"
त्री बोला, “इसका मतलब है कि ताकानोरी ने ठीक कहा था, वह सचमुच नारायणपुर में ही है। दूसरी बात है कि उसकी शक्ति-लहर कमज़ोर है, क्योंकि वह माधव को यहाँ से नहीं दिखी। इसका मतलब है कि वह हमें इतनी दूर से नहीं खोज सकता, अवश्य कल हमें यहाँ पर खोजने आयेगा।"
वह चारों नीचे लौट आये और त्री ने उन्हें भी सोने के लिए कहा। आभा चुपचाप, जिस बिस्तर पर तृप्ति सोई थी, उसके साथ जा कर लेट गयी। अपनी बेटी को खोने के बाद यह पहली बार थी कि वह किसी बच्चे के साथ इस तरह से बिस्तर पर लेटी थी। अचानक उसे अपनी बेटी की बहुत याद आयी और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। बहुत देर तक वह चुपचाप रोती रही, फ़िर उसे भी नींद आ गयी।
सुबह आठ बजे त्री ने सबको जगाया और मुँह-हाथ धो कर नाश्ता करने के लिए कहा। नाश्ते के लिए तहखाने की रसोई में केले, अनानास और पका हुआ कटहल रखे थे। जब सबने अपनी प्लेटों में नाश्ता ले लिया तो त्री बोला, “नाश्ते के बाद तीन लोग - मैं, रंगनाथ और गार्गी, हम गुरु जी के वृद्धाश्रम की जाँच करने जायेंगे। उनका आश्रम यहाँ से करीब तीस किलोमीटर दूर है। मेरे विचार में उस जापानी की अन्वेषण-किरण केवल तीन-चार किलोमीटर की परिधि में काम करती है, लेकिन फ़िर भी वहाँ पहुँचते ही गार्गी करीब बीस-पच्चीस मिनट के लिए हमारी शक्ति-लहरों को ढक लेगी। वहाँ जाँच करके हम लोग शाम तक लौट आयेंगे।"
"और हम लोग? क्या हम सारा दिन इस तहखाने में बंद रहेंगे?”, आभा ने पूछा।
“तुम लोग यहीं रहोगे, पर मैं तुम्हें एक गुप्त रास्ता दिखाऊँगा, तुम लोग वहाँ से आसपास थोड़ा-बहुत घूम सकते हो, पर दूर नहीं जा सकते।"
आभा बोली, “अच्छा बताओ, रात को वसंत ने उस जापानी व्यक्ति की शक्ति-लहर को कैसे खोजा था?”
त्री ने उसे बताया कि पेड़-पौधे भी गुप्त-शक्ति की लहरों को महसूस कर सकते हैं और आपस में संदेश भेज सकते हैं। इस तरह से वसंत चाहे तो उसे पेड़ों से, बहुत दूर की खबरें भी आसानी से मिल जाती हैं। उसने अपना मोबाइल निकाल कर उस पर गूगल मैप खोला और मजूली द्वीप के दक्षिणी भाग को आभा को दिखाया, बोला, “हमें यहाँ जाना है, गुरु जी का वृद्धाश्रम वहीं है। वह जापानी नदी के दूसरे ओर, उनके आश्रम से करीब छह-सात किलोमीटर दूर है, वहाँ हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।"
आभा ने थोड़ी देर सोचा, फ़िर पूछा, “रात को तुमने माधव से भी आँखें बंद करके शक्ति-लहर को देखने के लिए कहा था?”
“क्योंकि माधव की दो दृष्टि-शक्तियाँ है, वह अपनी आँखों से और मन की आँखों से, दोनों से दस-बारह किलोमीटर की दूरी तक देख सकता है। शक्ति-लहरों से एक विशेष तरह का प्रकाश निकलता है, वह उसे पहचान लेता है। वैसे तो वह जापानी बहुत दूर है, इसलिए मुझे पता था कि माधव को उसकी शक्ति-लहर नहीं दिखेगी, लेकिन मैंने उससे यह इस लिए पूछा था ताकि हमें डबल पक्का हो जाये कि आसपास हमें खोजने वाला कोई नहीं है।"
आभा बोली, “यह शक्ति वाली बातें मेरे लिए नयी हैं, इन्हें समझने में मुझे कुछ समय लगेगा।"
कुछ देर बाद त्री ने उससे पूछा, “जब तुम सोने गयीं थीं, उस समय कुछ हुआ था?”
“क्यों?”
“क्योंकि मैंने देखा कि अचानक ही फर्श पर चिलचट्टे, कानखजूरे, बिच्छू, छिपकलियाँ, आदि जीव-जन्तु निकल आये, और वह सब तुम्हारे बिस्तर के आसपास घूम रहे थे। मुझे लगा कि वह तुम्हारी पहरेदारी कर रहे हैं। थोड़ी देर के बाद शायद तुम सो गयीं और वह सभी अपने बिलों में वापस लौट गये। जब वह दिखते हैं तो मुझे पता चल जाता है कि तुम्हारी शक्ति जागृत है।"
उसकी बात सुन कर आभा कुछ देर तक सोचती रही, फ़िर रुँधे स्वर में बोली, “बेटी खोने के बाद आज पहली बार एक छोटी बच्ची के साथ इस तरह से लेटी थी, इसलिए उसकी याद आ गयी तो मुझे रोना आ गया।"
त्री सोचता हुआ बोला, “इसका मतलब है कि जब तुम्हारे मन में भावनायें तीव्र होती हैं, तब तुम्हारी शक्ति आपने आप जागृत हो जाती है।"
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अगला अध्याय सोमवार 20 जुलाई को पढ़ सकेंगे
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