अब तक की कहानी: ताकानोरी जामुन बाबा की
मूर्ति चाहता है। उससे बचने के लिए बाबा समाधी ले लेते हैं। बाबा का शिष्य
त्रिनेत्र पाँच गुप्त-शक्ति वाले बच्चों और आभा के साथ मजूली पहुँचा है। ताकानोरी आभा, वसंत
और तृप्ति को उठा कर नारायणपुर ले जाता है और उन तीनों को एक कमरे में बंद कर देता है। त्री को यह सब खबर मिल चुकी है, अपने साथियों से बात करने वह आ रहा है ... इसके आगे पढ़िये ...
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अध्याय 21
नारायणपुर, असम, 5 मार्च 2026
आभा समझ गई है कि जब वसंत पेड़ों-पौधों के पास खड़ा हो कर उनसे बातें करता है तो ताकानोरी उसकी शक्ति को नहीं देख पाता। कमरे में लौट कर उसने वसंत से कहा कि वह बेधड़क हो कर त्री, रंगनाथ और गार्गी से बात कर सकता है। इस तरह से उसने गार्गी को बताया कि वह लोग नारायणपुर में बंदी हैं। गार्गी ने यह बात त्री को बतायी तो वह बोला, “उनसे कहो कि कल हम वहाँ तुमसे मिलने आयेंगे।"
अन्वेषण-किरण का प्रयोग करने के लिए ताकानोरी को ध्यान लगाना पड़ता है और थोड़ी देर के बाद वह थक जाता है तो उसे अपनी खोज बंद करनी पड़ती है। वह दिन में केवल तीन-चार बार अन्वेषण-किरण का प्रयोग कर सकता है, बाकी समय में वह उन पर निगरानी नहीं रख पाता।
ताकानोरी के गुँडे उनके कमरे में घुसने से डरते हैं क्योंकि जब वह वसंत और तृप्ति के लिए ट्रे में खाना ले कर कमरे में गये थे तो तृप्ति की शक्ति से स्टील की प्लेटें और चम्मच हवा में उड़ने लगे थे, इसलिए उन्हें लगा कि उस कमरे में भूत हैं।
अगले दिन सुबह, त्री, रंगनाथ, गार्गी और माधव नाव में नारायणपुर के पास के छोटे से शहर मोरनाइगुड़ी में आये और वहाँ एक छोटे से होटल में एक दिन के लिए एक कमरा लिया। रंगनाथ और माधव को होटल में छोड़ कर, त्री और गार्गी ने नारायणपुर के लिए टैक्सी ली।
रास्ते में गार्गी ने वसंत से सीधा सम्पर्क बना कर उससे सारी जानकारी ली और उसे कहा, “हम लोग आज सुबह नारायणपुर आयेंगे और त्री दादा अदृश्य हो कर ताकानोरी के घर में घुसेंगे। अगर तुम्हें महसूस हो कि दादा वहाँ हैं तो होशियार रहना, कुछ नहीं बोलना या करना जिससे उन्हें शक हो कि वह वहाँ हैं। यह बात आभा दीदी और तृप्ति को भी समझा देना।"
जब उनकी टैक्सी ताकानोरी के घर के पास पहुँची तो गार्गी ने अपनी और त्री की शक्तियों को ढक लिया। ताकानोरी के घर से कुछ पहले दोनों टैक्सी से उतर गये और आगे पैदल गये। बाकी घरों के मुकाबले में वह घर बड़ा था, उसे पहचानने में मुश्किल नहीं हुई। उसके घर के दूसरी ओर, बादल सत्र का नामघर था जिसके पास एक तालाब था। नामघर से हो कर, त्री और गार्गी तालाब के पास जा कर बैठ गये।
गार्गी बोली, "दादा, यहाँ से ताकानोरी का घर दूर नहीं है, मैं यहाँ बैठ कर आप की शक्ति को ढक लूँगी, आप अदृश्य हो कर उसके घर में घुस सकते हो।"
जिस समय त्री और गार्गी नामघर के तालाब के पास बैठे, उस समय ताकानोरी ने आभा को फिर से अपने कमरे में बुलाया और उससे पूछा, “क्या तुम लोगों ने त्रिनेत्र को खबर दे दी है कि तुम तीनों अब मेरे बंदी हो?”
आभा ने धीरे से सिर हिला कर हामी भरी।
"तुम लोगों ने उससे कैसे सम्पर्क किया?”, रात को ताकानोरी ने देर से वेबकैम और अपनी अन्वेषण-किरण से उनके कमरे पर निगरानी रखी थी लेकिन उसने वहाँ से किसी को बात करते हुए या वहाँ से गुप्त-शक्ति की लहर को निकलते या आते हुए महसूस नहीं किया था।
आभा मुस्करायी, बोली, “मुझे अपनी शक्ति नियंत्रित करनी नहीं आती और शक्ति के माध्यम से बातचीत करने का मेरा अनुभव कम है, इसलिए मैं आप को इस बात को ठीक से नहीं समझा सकती। जहाँ तक मुझे मालूम है, यह सम्पर्क हमने नहीं किया बल्कि त्री ने हमारे साथ किया था, लेकिन उसने मुझसे बात नहीं की, केवल बच्चों से की। उसे वसंत और तृप्ति की आधिक चिंता है, मैं तो उसके लिए अजनबी जैसी हूँ।"
“इसका मतलब है कि वह बीस-तीस किलोमीटर की दूरी से भी बच्चों से सम्पर्क कर सकता है?”
आभा ने कँधे उचका दिये, बोली, "मैंने कहा न कि मुझे यह सब नहीं मालूम", फिर उससे पूछा, “जब तुम्हें वह गुप्त शक्ति वाली मूर्ति मिल जायेगी तो क्या तुम त्रिनेत्र को और हमें मार दोगे?”
“तुम्हें मारने की बात मैंने कब की?”, ओरी ने पूछा।
"कल शाम को तुम मुझे धमकी दे रहे थे कि त्रिनेत्र से कहना कि अगर वह तुम्हें वह मूर्ति नहीं देगा तो तुम हम तीनों को मार दोगे?", आभा बोली।
ओरी उसे थोड़ी देर तक देखता रहा, फिर बोला, “मूर्ति को पाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हैं, तुम्हें और बच्चों को मार भी सकता हूँ। लेकिन मैं समुराई योद्धा हूँ, बिना कारण मैं औरतों और बच्चों को नहीं मारता।"
आभा उसके सामने जा कर बैठ गयी, “तुमसे एक प्रश्न पूछ सकती हूँ? अपनी शक्ति के बारे में कुछ बताओ कि वह कब और कैसे विकसित हुई?”
ओरी जानता है कि इस काम में यह युवती उसके दुश्मन की साथी है और उसे अपने बारे में बताना ठीक नहीं होगा। दूसरी ओर, बचपन से उसके मन में अपनी शक्ति के बारे में प्रश्न उठते रहे हैं, लेकिन आज तक उसे ऐसा कोई नहीं मिला है जिससे वह यह बातें कर सके। उसने सोचा कि वह उसे अपनी गुप्त शक्ति के बारे में कुछ नहीं बतायेगा लेकिन वह इस विषय पर वह दोनों सामान्य बातें कर सकते हैं।
यह सोच कर वह धीरे से बोला, “जिस तरह से तुम सब शक्ति वाले लोग, एक साथ रहते हो और एक साथ शक्ति साधने का अभ्यास करते हो, मुझे वैसा मौका नहीं मिला। मेरे पिता यामागुचि सान के लिए काम करते थे। जब मैं बच्चा था तब मेरे पिता की मृत्यु हो गयी थी। यामागुचि सान में भी शायद कुछ शक्ति थी और उन्होंने मेरी शक्ति को पहचाना। उन्होंने मुझे लड़ना और शस्त्र चलाना आदि सिखाने के लिए गुरु रखे, और बड़ा हो कर मैं उनके साथ काम करने लगा। बचपन से ही मैं उनका रक्षक था, उन्हें दुश्मनों से बचाता था। अब वह बहुत बूढ़े हो गये हैं, आजकल उनका पोता रिकू यामागुचि उनके धँधे का मालिक है।"
“गुँडागर्दी, मार-पिटाई और मासूम लोगों का खून करना, वह सब तुम्हें किसने सिखाया?”
आभा का प्रश्न ताकानोरी पर वज्र जैसे गिरा, वह चुप हो गया। फिर उसने अपने आदमी को बुलाया और आभा को नीचे ले जाने के लिए कहा।
तालाब के पास बैठी गार्गी ने आभा और ताकानोरी की सभी बातों को सुना और उनके बारे में त्री को बताया। वह बोली, “ताकानोरी के मन में आभा दीदी के लिए प्रेम जाग रहा है, शायद इसीलिए वह उनके प्रश्न से गुस्सा हो गया। वह नहीं चाहता कि दीदी उसे एक गुँडे या खूनी की तरह देखे।"
त्री को विश्वास नहीं हुआ, बोला, “अभी कल ही तो वह पहली बार आभा से मिला है, इतनी जल्दी उसे उससे प्रेम कैसे हो गया?”
“दादा, यह प्रेम पूछ कर या सोच-समझ कर नहीं होता", गार्गी हँसी, “क्योंकि तुम्हें अभी तक किसी से प्रेम नहीं हुआ इसलिए तुम इस बात को नहीं समझ सकते।"
“अच्छा यह बातें अब रहने दो। इस समय हमारे तीनों साथी, एक साथ नीचे वाले कमरे में बंद हैं, मैं उनसे मिलने जा सकता हूँ।"
“हाँ दादा, अभी अच्छा मौका है", गार्गी ने हामी भरी, “इस समय ताकानोरी का मन भी विचलित है, अभी कुछ देर तक वह ठीक से ध्यान नहीं लगा पायेगा, तुम तुरंत वहाँ जाओ।"
त्री सड़क पार करके ताकानोरी के घर की ओर आया। आज उसने सफेद और हलके रंग वाले कपड़े पहने हैं, जिसमें उसके लिए अदृश्य होना अधिक आसान है। उसकी गिरगिट शक्ति, उसके शरीर और वस्त्रों के रंगों को फीका कर देती है, वह पारदर्शी सा हो जाता है और आसानी से दिखायी नहीं देता।
ताकानोरी के घर के चारों ओर, बाँस की चटाई लगी थी, वह उससे सट कर चलने लगा, एक क्षण में ही वह उस चटाई में बिल्कुल घुल-मिल गया। वह घर के गेट के पास जा कर रुक गया। गेट के भीतर दो आदमी बैठ कर धीमे स्वर में बातें कर रहे थे, एक प्रौढ़ था, पैंतालिस-पचास साल का और दूसरा जवान, पच्चीस-तीस का।
कुछ देर के बाद, घर के भीतर से एक औरत निकली और उनसे बोली कि बाज़ार से कुछ तरकारी लानी है। जवान युवक ने उससे पैसे और थैला लिए और गेट खोल कर बाहर निकला। जब तक वह अपने पीछे गेट बंद करता, त्री फुर्ती से भीतर घुस गया और वहाँ की झाड़ियों के साथ खड़ा हो गया, एक पल में उसका रंग बदल कर झाड़ियों जैसा हो गया। दूसरे चौकीदार को लगा कि कोई भीतर घुसा है, तो उसने सिर घुमा कर आसपास देखा लेकिन तब तक त्री गुम हो चुका था।
चौकीदार वापस बैठा तो त्री धीरे से भीतर की ओर सरक गया। एक बार फिर से चौकीदार को लगा कि वहाँ कोई है, उसने घूम कर देखा लेकिन उसे कुछ नहीं दिखा।
जब वह औरत वापस घर के भीतर गयी थी तो उसने पीछे से दरवाज़ा बंद कर दिया था। इस बार त्री ने प्रतीक्षा नहीं की, एक झटके में दरवाज़ा खोला और भीतर घुस गया। भीतर बायीं ओर कुछ कुर्सियाँ रखी थीं, वहाँ दो आदमी बैठ कर ताश खेल रहे थे, उनकी बन्दूकें दीवार से टिकी रखी थीं। जब तक उन्होंने दरवाज़े की ओर सिर घुमाया, त्री घर के भीतर आ कर और दीवार के रंग में घुलमिल सा गया था।
"यह दरवाज़ा कैसे खुल गया?”, एक आदमी उठ कर देखने आया, बाहर झाँका, देखा कि कोई नहीं है, तो पीछे से दूसरा बोला, “रसोई वाली ने ठीक से बंद नहीं किया, हवा से खुल गया होगा।"
पहले वाला आदमी बोला, “बाहर ऐसी कोई हवा तो नहीं चल रही।"
वह दरवाज़े की बातें कर रहे थे, और त्री वहाँ से जा चुका था। गार्गी उससे सम्पर्क बनाये थी, उसने उसे दिशा बतायी कि आभा और बच्चे किस ओर हैं। वह सीधा उनके कमरे तक पहुँच गया। कमरे पर बाहर से कुँडी लगी हुई थी लेकिन वहाँ पर कोई पहरेदार नहीं था। उसने जल्दी से कुँडे को खोला, भीतर घुस कर पीछे से दरवाज़ा बंद कर दिया।
आभा, वसंत और तृप्ति ने दरवाज़ा खुलते हुए देखा लेकिन कोई भीतर नहीं आया, पर तृप्ति तुरंत समझ गयी कि वह है, खुश हो कर बोली, “त्री दादा, तुम आ गये।"
तब त्री प्रकट हुआ और उन्हें दिखने लगा। उसने होठों पर उंगली रख कर उन्हें चुप रहने का इशारा किया, फिर कुछ क्षणों तक बाहर की ओर कान लगा कर पहरेदारों की बातें सुनीं। तृप्ति तुरंत उससे लिपट गयी।त्री ने तृप्ति को गोदी में उठा लिया, धीरे से बोला, “आज मैं तुम्हें यहाँ से छुड़ाने नहीं आया, तुम्हें अभी एक-दो दिन यहीं रहना है। मैं तुम्हें केवल यह दिखाना चाहता हूँ कि मेरे लिए तुम्हें छुड़ाना बहुत आसान है, जब चाहूँ तुम्हें यहाँ से निकाल कर ले जा सकता हूँ, समझे? इसलिए तुम लोग डरो नहीं और इन दिनों को छुट्टियों की तरह समझो।”
फिर आभा से बोला, "तुम ताकानोरी से जो बातें कर रही हो, वह बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि मैं उसके और उसके मालिकों के मन में क्या है, यह जानना चाहता हूँ।"
आभा बोली, “वह हमेशा एक मूर्ति की बात करता है और कुछ नहीं कहता।"
“हाँ, मूर्ति की बात तो है। लेकिन हमें उसकी पूरी बात समझनी है, मैं नहीं चाहता कि भविष्य में हमारे अनाथाश्रम पर या हमारे बच्चों पर, कोई खतरा आये। तुम उससे सावधान रहो, वह खतरनाक खूनी है, पता नहीं अब तक कितने लोगों को मार चुका होगा।”
आभा मुस्करायी, बोली, “मुझे उससे कोई खतरा नहीं होगा। मैं यह नहीं कहती कि वह खूनी नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि वह अपने आप को बहुत अकेला महसूस करता है।"
“फिर भी तुम चौकन्नी रहो, उसका भरोसा मत करो। अब मैं जाता हूँ, एक-दो दिन में दोबारा तुमसे मुलाकात होगी। हमें तुम्हारी और मेरी अदला-बदली करनी है, मैं उसका बँधक बन जाऊँगा और तुम तीनों मुक्त हो जाओगे। यह कैसे और कब करेंगे, इसके बारे में प्लैन बना कर मैं तुम्हें खबर करूँगा, तुम लोग बिल्कुल चिंता मत करना।"
“दादा, तुम जा रहे हो?”, तृप्ति रोने लगी।
“अरे, तुम तो मेरी सबसे बहादुर यौद्धा हो, जब तुम तलवार और चाकू चलाती हो तो बड़े-बड़े डाकू-लुटेरे भी डर कर भाग जाते हैं, तुम रोओगी तो मैं क्या करूँगा?", त्री ने उसे कहा ।
तब तृप्ति ने अपने आँसू पोंछ लिये और मुस्कराने की कोशिश की, बोली, "ठीक है दादा, मुझे लेने जल्दी लौटना।"
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अगला अध्याय बृहस्पतिवार 13 अगस्त को पढ़ सकते हैं
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