अब तक की कहानी: ताकानोरी ने जामुन बाबा को खोज लिया है लेकिन बाबा उसके जाल से निकल जाते हैं और वृद्धाश्रम में जीवित समाधी ले लेते हैं। गँगटोक में त्रिनेत्र के अनाथाश्रम में उसके मित्र की बहन आभा आई है। उन्हें समझ में आता है कि आभा की भी एक गुप्त-शक्ति है, कि वह कीड़े-मकोड़ों से बातें कर सकती है। त्रिनेत्र अपने साथ अनाथाश्रम के गुप्त शक्ति वाले पाँच बच्चों के साथ, बाबा की रक्षा के लिए मजूली के वृद्धाश्रम में जाने के लिए तैयार हो रहा है। इधर ताकानोरी अपने साथी सोमचाई और तीन गुँडों के साथ वृद्धाश्रम में पहुँच गया है और शक्ति वाली हरित तारा की मूर्ति को खोज रहा है। इससे आगे पढ़िये ...
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अध्याय 11
गँगटोक से असम की ओर, 3 मार्च 2026
भोजनालय में आभा और बच्चे चुपचाप त्रिनेत्र को देख रहे थे। टेलीफोन पर अपने गुरु जी के समाधी लेने की बात सुन कर जब वह रोया था तो वह वहीं थे।
उस रात को जब उसके घर में आभा जागी थी तो त्री ने उसे कहा था, “चलो तुम्हें छात्रावास छोड़ कर आता हूँ।"
“क्यों? अगर मैं तुम्हारे कमरे में रुकी तो तुम्हारा नाम बदनाम हो जायेगा?”, आभा ने पूछा था।
“नहीं, यहाँ कोई नहीं है जो मेरा या तुम्हारा नाम बदनाम करे", त्री मुस्कराया था, “लेकिन कुछ घंटे बाद हमें एक लम्बी यात्रा पर जाना है। तुम अपने कमरे में जाओगी तो मैं अपनी चटाई पर ठीक से सो सकूँगा।"
“तुम बच्चों को ले कर कहाँ जा रहे हो?”त्री एक पल उसे चुपचाप देखता रहा, बोला, “हम ऐसे ही घूमने जा रहे हैं।"
“घूमने जा रहे हो, तो कल रात को हथियारों की बात क्यों हो रही थी?”
त्री ने उसे उत्तर नहीं दिया तो वह बोली, “मैं बच्ची नहीं हूँ, मैंने अपने पति और बेटी को खोया है। अगर कोई कठिन परिस्थिति आई है, जिसके बारे में तुम बच्चों से बात कर सकते हो तो मुझे क्यों नहीं बता सकते?”
फ़िर भी जब त्री ने कुछ नहीं कहा तो वह बोली, “कल पहले तुम्हारे अखाड़े में मुझे वह अजीब सा अनुभव हुआ। फ़िर, तुम लोग किसी गुप्त-शक्ति की बात रहे थे, कि मेरी शक्ति कीड़े-मकोड़ों और जीव-जंतुओं से जुड़ी है। उसके बाद, जब मैं यहाँ भीतर सो रही थी तो मुझे बाहर से तुम्हारी बातें स्पष्ट सुनाई दे रहीं थीं, ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरे दिमाग का एक हिस्सा सोया हो और दूसरा, जागा हुआ सतर्क हो।"
त्री ने लम्बी साँस ली, बोला, “जो गुप्त-शक्ति मुझमें और बच्चों में हैं, वह तुममें भी हैं, लेकिन तुम्हारी शक्ति ठीक से विकसित नहीं हुई हैं, तुम उस पर नियंत्रण करना नहीं जानती। तुममें जीव-जन्तुओं से बात करने की शक्ति है और तुम्हारी श्रवण शक्ति भी विकसित लगती है। अगर तुम इन शक्तियों को पूर्ण विकसित करना चाहती हो तो तुम्हें कुछ समय यहाँ हमारे पास रहना पड़ेगा। अगर तुम अपने भाई के पास या गाँव में लौट जाओगी, तो हो सकता है कि तुम्हारी यह शक्ति जो यहाँ जागृत हुई है, वह फ़िर से सो जाये।"
“कल रात को तृप्ति ने अपनी मनोशक्ति से एक लोटे को उठाया था और गार्गी ने मुझे अंतरमन के भीतर से छुआ था?"
त्री ने सिर हिला कर हामी भरी, बोला, “हाँ, उनकी यही शक्तियाँ हैं। कुछ दिनों में जब हम लौटेंगे, तुम भी यहाँ वापस आ सकती हो, हम तुम्हारी शक्तियों को विकसित करने में तुम्हारी मदद करेंगे।"
“शक्ति विकसित करने से क्या फायदा है?”
“यह लाभ-नुकसान की बात नहीं है, शक्ति का होना एक ज़िम्मेदारी है। इनसे हम गरीब, निर्बल, असहाय और शोषित जनों की मदद करते हैं। तुम कह सकती हो कि हम शक्ति-यौद्धा हैं और यह हमारा धर्म है।"
“कल रात को वसंत किसी तिरंगा यौद्धा की बात कर रहा था?”
त्री मुस्कराया, बोला, “जब वसंत यहाँ आया था, तब उसने हमारे नामों के पहले अक्षर, त, र और ग को मिला कर तिरंगा बना दिया था। तब से बच्चे हम सब को तिरंगा-यौद्धा भी कहते हैं।"
“तो मुझे भी बताओ कि कल सुबह तुम तिरंगा यौद्धा किसकी मदद के लिए युद्ध पर जाओगे?”
“मेरे गुरु जी मुश्किल में हैं। मैं असम में गुवाहाटी के पास पैदा हुआ था और बचपन में अनाथ हो गया था। गुरु जी ने मुझे शरण दी, मुझे पाला-पोसा, मेरी शक्ति को पहचाना और उसे विकसित किया। उनके कहने पर ही मैंने यह अनाथाश्रम खोला है। कुछ लोग बहुत सालों से उनका पीछा कर रहे हैं। कल सुबह गुरु जी ने मुझे बताया कि उन लोगों ने उन्हें खोज लिया है, इससे उनकी जान को खतरा है, और हम उनकी रक्षा करने जा रहे हैं।"
आभा चुप हो गयी थी और वह उसे लड़कियों के छात्रावास के पास छोड़ कर लौट आया था।
आज सुबह जब वह बच्चों के साथ नाश्ता कर रहा था और जगदीश बाबू ने उसे गुरु जी की समाधी लेने का समाचार दिया, उस समय आभा वहाँ थी।
जब वे गाड़ी में बैठे तो आभा उसके साथ आगे वाली सीट पर बैठी। उनकी कार अनाथाश्रम से बाहर निकली ही थी कि वह बोली, “मैं भी तुम्हारे साथ चलना चाहती हूँ।"
त्री ने कहा, “नहीं, तुम हमारे साथ नहीं आ सकतीं।"
“क्यों?”
“क्योंकि इसमें खतरा है।"
“अगर छह साल की तृप्ति तुम्हारे साथ जा सकती है तो मैं क्यों नहीं?”
“क्योंकि जिसे तुम छह साल की बच्ची कहती हो, वह चाहे तो अपनी शक्ति से चाकू-तलवार चला कर अपनी रक्षा कर सकती है और हमारे युद्ध में योगदान दे सकती है।"
आभा कुछ सोच कर बोली, “दो साल पहले तस्करों ने बम से मेरे पति की कार उड़ा कर, उनकी और मेरी बेटी की जान ली थी। तब मैंने कई महीनों तक आत्महत्या करने की सोची थी। लेकिन अब मैं जीना चाहती हूँ और उन लोगों से बदला लेना चाहती हूँ। मैं भी तुम्हारी तरह यौद्धा बनना चाहती हूँ, डर कर घर में छिप कर जीना नहीं चाहती। मेरी शक्ति तुम लोगों की तरह विकसित नहीं है, मुझे लड़ाई करनी भी ठीक से नहीं आती, लेकिन मैं सीधी-साधी सामान्य औरत दिखती हूँ और तुमने देखा कि मेरी श्रवण शक्ति बहुत अच्छी है, मैं सोते हुए भी दूर से बातें सुन सकती हूँ। अगर मैं तुम्हारे साथ रहूँगी तो हम लोग एक परिवार जैसा लगेंगे और गुँडों को धोखा देना अधिक आसान होगा।"
पीछे बैठे बच्चे उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे थे लेकिन उनमें से कोई कुछ नहीं बोला।
“और वहाँ तुम कुछ हो गया तो?” त्री बोला।
“अधिक से अधिक वह मुझे मार देंगे और क्या? मैं मरने से नहीं डरती।"
“और अगर मरो नहीं, पर सारे जीवन के लिए अपाहिज हो जाओ तो?”
“क्यों, क्या अपाहिज लोग इन्सान नहीं होते? अगर बुरे लोगों के साथ युद्ध में मैं घायल होती हूँ या मर जाती हूँ तो मुझे इसका रत्ती भर भी रंज नहीं होगा।"
यह बातें करते हुए, वह लोग रानी खोला पुल पर पहुँच गये थे। वहाँ से कुर्स्यांग जाने वाली सड़क अधिक दूर नहीं थी, इसलिए त्री को वहाँ पहुँचने से पहले ही यह निर्णय लेना था, वह बोला, “विशाल से बात करते हैं।"
आभा गुस्सा हो गयी, बोली, “इसमें भैया से पूछने की क्या ज़रूरत है? मैं क्या उन पर निर्भर करती हूँ? मैं उनके यहाँ कुछ दिन के लिए आयी थी, लेकिन मेरा अपना घर है, मैं अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हूँ। वैसे भी वह मेरे बड़े भाई हैं, तुम उनसे पूछोगे कि इसे युद्ध में ले जायें या नहीं, तो वह क्या कहेंगे? वह तो मना ही करेंगे।”
पीछे से गार्गी बोली, “आभा दीदी ठीक कहती हैं, उन्हें साथ ले जाने, या न ले जाने का निर्णय तो आप को ही लेना पड़ेगा। इनके भाई से पूछने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह कोई बच्ची नहीं हैं।"
आखिर में त्री बोला, “ठीक है, तुम हमारे साथ चलना चाहती हो तो चलो।"
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उपन्यास का अगला अध्याय बृहस्पतिवार 09 जुलाई 2026 से पढ़ सकते हैं।
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