शनिवार, जुलाई 02, 2005

अंतरजाल का कमाल

सुबह सुबह उठ कर तैयार हुआ और रेलवे स्टेश्न गया।

बोलोनिया से रोम तक की यात्रा में करीब तीन घंटे लगे। फ़िर वहाँ से मैट्रो ली, फ़िर बस ली। बाहर से देखने में तो जगह बहुत सुंदर थी, हाँलाकि कुछ दूर अवश्य थी। पहाड़ियाँ और हरे भरे पेड़। होटल ढूंढने थोड़ी कठिनाई हुई, पहुँचते पहुँचते, पसीने से कमीज़ पीठ पर चिपकने लगी थी, होटल एक पहाड़ी पर जो था। होटल देखा तो दिल धक्क सा रह गया। दीवारों पर उतरे हुए रंग, गिरती हुई सी दीवारें। अंदर भी वैसा ही हाल था। हर चीज़ पर धूल की परत, थोड़े से लोग इधर-उधर बैठे हुए।

 

इंटरनैट पर तो बहुत अच्छा लग रहा था, पर सच्चाई अंतरजाल मे दिखाये गये सच से बिल्कुल भिन्न थी। 

हमें एक मीटिन्ग के लिए होटल बुक करना था, उसी बुकिन्ग के लिए गया था। लेकिन वह होटल हमारी मीटिंग के लिये उपयुक्त नहीं था, बिना बुकिन्ग किये ही लौटना पड़ा। इतनी दूर आ कर मायूसी। फ़िर वापस बोलोनिया आने के लिये, उतनी ही लम्बी यात्रा की और पूरे रास्ते पछता रहा था कि यूँ ही सारा दिन बेकार किया और काम भी नहीं हुआ। अब कोई अन्य जगह ढूँढनी पड़ेगी।

यह है इंटरनेट का कमाल, गधे को दिखाया जैसे घोड़े की चाल, यह मेरी एक नई कहावत है। सोचता हूँ, कैसे लोग ईबे (ebay) जैसी जगह से चीज़े खरीद लेते हैं, क्या उन्हें भी ऐसे लोग धोखा दे सकते हैं ?

फ़िर यह भी सोचा कि, आज के भूमंडलीकरण और अंतरजाल की दुनिया मे अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिये, आजकल कौन सी नयी कहावतें बन रही हैं या बन सकती हैं ?

आज की कविता मे हैं, विदिशा की सुश्री अमिता प्रजापति की कविता "मत हो उदास" की कुछ पंक्तियाँ

ओ नीलू मत हो निराश
कि चूक हुई है
हमारी पुरखिन मांओ से
नहीं बना पायीं वे ऐसे पुरुष
कि घुल सकें, बह सकें
हवाओं मे हल्के हो कर

ये हमारे पुरखे पिता
जो कसे हुए घोड़ों की तरह
अपनी टापें हमारी छाती पर रखा करते थे
भाई, पिता, प्रेमी और पति बन कर


*****

2 टिप्‍पणियां:

  1. भालकी

    कौना सा राज्य, जिला?

    जवाब देंहटाएं
  2. भालकी उत्तरी कर्नाटक के बिदार जिले में है. नजदीकी हवाई अड्डा है हैदराबाद.

    जवाब देंहटाएं

"जो न कह सके" के आलेख पढ़ने एवं टिप्पणी के लिए डॉ. सुनील दीपक की ओर से आप का हार्दिक धन्यवाद.

इस वर्ष के लोकप्रिय आलेख