मोज़ाम्बीक में था तो भी नेपाल के समाचार मिल रहे थे. हर रोज़ पुलिस लोगों पर गोली चला रही, लाठियाँ बरसा रही है. आग लगी है नेपाल में और मन में बार बार वहाँ के स्थिति के बारे में चिंता होती है.
पंद्रह साल पहले जब बर्लिन की दीवार गिरी थी तब एक के बाद एक, पुलिस, मिलेट्री और बंदूकों से रक्षित तानाशाहों को अचानक समझ आया था कि जिन किलों में बंद करके खुद को सुरक्षित महसूस करते थे वे बालू के किले थे जो जनरोष के सामने आसानी से ठह गये थे. वैसा ही लगता है नेपाल के बारे में भी. जिस तरह से डाक्टर, वकील, छात्र, पर्यटन कार्य वाले, आम व्यक्ति, सब लोग मिल कर नेपाल के राजा से प्रजातंत्र लाने के लिए मांग कर रहे हैं, उसके सामने पुलिस का दमन अधिक नहीं चल सकता. मेरे विचार में पुलिस और मिलेट्री वाले भी जनता के साथ हो जायेंगे क्योंकि अगर सारा नेपाल मिल कर एक आवाज़ से बदलाव माँग रहा है तो वे इससे बाहर नहीं रह सकते.
यह ताश के पत्तों का किला गिरेगा तो सही, पर गिरने से पहले कितनों की जानें लेगा ?
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
इस वर्ष के लोकप्रिय आलेख
-
हिन्दू जगत के देवी देवता दुनिया की हर बात की खबर रखते हैं, दुनिया में कुछ भी ऐसा नहीं जो उनकी दृष्टि से छुप सके। मुझे तलाश है उस देवी या द...
-
पाराम्परिक भारतीय सोच के अनुसार अक्सर बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये और क्या काम करना चाहिये से ले कर किससे शादी करनी चाहिये, सब बातों के लिए मा...
-
लगता है कि इस वर्ष सर्दी कहीं सोयी रह गयी है. नवम्बर शुरु हो गया लेकिन अभी सचमुच की सर्दी शुरु नहीं हुई. यूरोप में हेमन्त का प्रारम्भ सितम...
-
केवल एक सप्ताह के लिए मनीला आया था और सारे दिन कोन्फ्रैंस की भाग-दौड़ में ही गुज़र गये थे. उस पर से यूरोप से सात घँटे के समय के अंतर की वज...
-
परिवार के पुराने कागजों में कुछ खोज रहा था, तो उनके बीच में कुछ पत्र भी दिखे. इन पत्रों में हिन्दी साहित्य के जाने माने लेखक भी थे. उनमें से...
-
शिक्षा को जीवन की व्यवाहरिक आवश्यकताओं को पाने के माध्यम, विषेशकर नौकरी पाने के रास्ते के रूप मे देखा जाता है. यानि शिक्षा का उद्देश्य है लि...
-
पिछली सदी में दुनिया में स्वास्थ्य सम्बंधी तकनीकों के विकास के साथ, बीमारियों के बारे में हमारी समझ बढ़ी है जितनी मानव इतिहास में पहले कभी नह...
-
बात कहीं से शुरु होती है और फ़िर किसी अन्य दिशा से कोई तार उससे आ मिलते हैं, और बातों में बातें जुड़ जाती हैं. कुछ यूँ ही हुआ जब मैंने ...
-
"हैलो, मेरा नाम लाउरा है, क्या आप के पास अभी कुछ समय होगा, कुछ बात करनी है?" मुझे लगा कि वह किसी काल सैन्टर से होगी और पानी या...
-
क्या आप को कभी भारतीय शहरों में गिद्धों की याद आती है? क्या आप को याद है कि आप ने आखिरी बार किसी गिद्ध को कब देखा था? शायद आप के छोटे बच्च...
राजा ज्ञानेन्द्र 'राजतंत्र' को समाप्त कर के ही मानेंगे। आम जनता मे राजतंत्र के लिये जो थोडा बहुत बचा हुआ सम्मान था वह भी अब खत्म हो चुका है।
जवाब देंहटाएंवैसे यह सही भी होगा लेकिन खून जरूर बहेगा।