अँग्रेज़ी की पत्रिका आऊटलुक में बँगलादेशी मूल की लेखिका सुश्री तस्लीमा नसरीन का नया लेख निकला है जिसमें तस्लीमा कुरान में दिये गये स्त्री के परदे के नियमों के बारे बतातीं हैं और कहतीं हैं इस्लाम और कुरान दोनों औरतों को परदे से सारा शरीर ढकने का आदेश देते हैं. उनका कहना है कि परदे का विरोध यह कह कर करना कि यह कुरान में नहीं लिखा है, नहीं किया जा सकता. बल्कि परदे का विरोध इस लिए किया जाना चाहिये क्योंकि यह औरत के सम्मान के विरुद्ध हैं. वह कहती हैं कि परदा औरत के शोषण का माध्यम है जिससे औरत को पुरुषों की सम्पत्ती बनाये रखा जा सके, जिससे औरतों को काबू में रखा जा सके.
इस तरह की कोई भी बात कहने के लिए आज बहुत साहस की आवश्यकता है. आप तस्लीमा जी की बातों से सहमत हों या न हों, यह मानने से इन्कार करना कठिन होगा कि इस तरह वही लिख सकता है जिसने अपने मार दिये जाने के बारे में सोच लिया हो और सिर पर कफ़न बाँध लिया हो.
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साहस को सलाम.
जवाब देंहटाएंइस बात से मैं सहमत नहीं हूँ की तसलिमा को
जवाब देंहटाएंमरने का खौफ नहीं है अगर ऐसा होता तो
वह भाग कर अपने देश से इतनी दूर नहीं जाती...
शुरु से हीं उनका मीडिया मे चर्चित रहने का
यह हथकंडा बना हुआ है...।
भाई, यहाँ खुद जो लिखते पढ़ते हें उसके कारण अपने को समझ नहीं आते तो दूसरे क्यों लिखते हैं, इसका सोचने से क्या फ़ायदा? पर तस्लीमा का मूल लेख आऊटलुक में पढ़ कर बताईये कि क्या आज के माहोल में इस तरह की बात करने के लिए कितनी हिम्मत चाहिए?
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