गुरुवार, जून 11, 2026

देवी प्रतिमा के रक्षक - अध्याय 04

अब तक: त्रिनेत्र को उसके गुरु जी जामुन बाबा (कोरिया से आये बौद्ध भिक्षुक जून मिन) ने एक अनाथाश्रम खोल कर उसमें शक्ति वाले बच्चों को तैयार करने के लिए कहा था। दूसरी ओर, जापान में यामागुची गैंग ने अपने याकूज़ा खूनी ताकानोरी को जामुन बाबा की गुप्त शक्ति वाली मूर्ति को लाने भारत भेजा है। एक दिन बाबा एक काम से नारायणपुर जाते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि किसी ने उनके भीतर छुआ है, वह समझ जाते हैं कि उनका पीछा करने वाला कोई वहाँ आया है। आगे पढ़िये:

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अध्याय 04

नारायणपुर, असम, 2 मार्च 2026 

जैसे ही ताकानोरी ने अन्वेषण-किरण से बाबा की शक्ति को महसूस किया, उसे भी झटका सा लगा। लेकिन वह नहीं समझ पाया कि शक्ति-लहर की वह अनुभूति एक क्षण के बाद ही लुप्त कैसे हो गई?

सोच कर वह इस नतीजे पर पहुँचा कि शायद उस भिक्षुक को अपनी शक्ति-लहर को छुपाना आता है। उसने तुरंत नक्शे से यह अन्दाज़ लगाने की कोशिश की कि वह भिक्षुक उस समय किस दिशा में, किस जगह पर है।

ओरी को भारत आये कई महीने हो चुके थे। जापान में हरूकी ने उसे कहा था कि उसने जून मिन को जोरहाट नाम के शहर में देखा था। भारत आ कर ओरी सबसे पहले जोरहाट ही गया। वह सोचता था कि अन्वेषण किरण की सहायता से वह जून मिन को आसानी से खोज लेगा लेकिन वह अन्वेषण-किरण को घुमाते-घुमाते परेशान हो गया था, पर जून मिन का पता नहीं चला था।

अन्वेषण किरण चलाने के लिए उसे ध्यान लगाना पड़ता है और उसे आधा घंटा भी चलाये तो इतना थक जाता है कि पाँच-छह घंटे तक सोता है। जोरहाट के आसपास वह बहुत घूमा लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। उसकी अन्वेषण-किरण छह-सात किलोमीटर की परिधि में काम करती है, उसके बाहर नहीं। इसलिए उसने बहुत शहर बदले, बहुत घूमा, पर बात नहीं बनी।

उसने रिकू यामागुची से टेलीफोन पर बात की और अपनी असफलता के बारे में बताया, तो रिकू बोला, “इतनी जल्दी उस बूढ़े से हार मान गये? ठीक है, यह तुम्हारे बस की बात नहीं, तुम जापान लौट आओ। जून मिन को खोजने मैं किसी और को भेजूँगा।"

लेकिन ओरी वापस नहीं लौटा। बल्कि उसने यामागुची से कहा कि वह थाईलैंड से सोमचाई नाम के एक कम्प्यूटर एक्सपर्ट को बुलायेगा और उसे कुछ हिन्दुस्तानी आदमी भी चाहिये जो उसके साथ काम कर सकें।

ओरी ने पहले भी कई बार सोमचाई के साथ काम किया था। वह जोरहाट आया तो ओरी ने उसे जून मिन की तलाश करने के लिए कहा। कुछ ही दिनों में सोमचाई ने, चेहरे पहचानने वाली एप्प और आर्टिफिशयल इन्टैलीजैंस की सहायता से जून मिन का पता लगा लिया और ओरी को बताया, “ब्रह्मपुत्र नदी की दूसरी ओर एक शहर है नारायणपुर, वहाँ की कुछ वेबकैम-फीड में मुझे जून मिन दिखा है। मेरे विचार में जून मिन नारायणपुर में नहीं रहता लेकिन महीने में दो-तीन बार वह वहाँ जाता है। वह शायद किसी गाँव में या ऐसी जगह रहता है जहाँ पर वेबकैम नहीं लगे। उसे खोजने के लिए हमें नारायणपुर जाना चाहिये।"

पंद्रह दिन पहले ओरी ने नारायणपुर में, उस क्षेत्र में किराये पर घर लिया है, जहाँ पर सोमचाई को वह दिखा था। तब से वह दिन में तीन-चार बार, थोड़ी देर के लिए अन्वेषण-किरण घुमा कर उसे खोजता है। आज सुबह भी उसने वैसे ही अन्वेषण किरण घुमाई थी और इस बार वह जून मिन को खोजने में सफल हुआ था।

वह तुरंत उठ कर सोमचाई के पास गया, और उसे नारायणपुर का नक्शा दिखा कर बोला, “जिस भिक्षुक को मैं खोज रहा हूँ, इस समय वह शहर में डकरोंग क्षेत्र में आया है। तुम उस क्षेत्र में जितने वीडियो-कैमरे लगे हैं, उनमें उसे खोजो। तब तक मैं आदमियों को ले कर वहाँ जाता हूँ, शायद वह हमें मिल जाये। अगर वह तुम्हें किसी वीडियो में दिखे तो मुझे फोन करके बताओ कि कहाँ है, किस दिशा में जा रहा है।"

उनके साथ मदद के लिए तीन हिन्दुस्तानी हैं, जिन्हें यामागुची के जानकार एक हिन्दुस्तानी गैंग ने वहाँ भेजा है - बटेर, लक्की और मटरू।

ओरी ने बटेर से कह कर अपनी जीप निकलवायी और उसे डकरोंग पोस्ट आफिस की ओर जाने के लिए कहा। उनका घर वहाँ से दूर नहीं था, वहाँ पहुँचने में उन्हें दस मिनट भी नहीं लगे। वहाँ पहुँच कर वह जीप से उतर कर इधर-उधर घूमा तो उसे बोरा साहब की दुकान के आसपास, एक शक्ति-लहर की हलकी सी प्रतिध्वनि महसूस हुई, वह समझ गया कि वह सही जगह आया है। उसने बटेर, लक्की और मटरू को गली में आसपास के लोगों से पूछताछ करने के लिए कहा कि शायद किसी ने उस दिन सुबह वहाँ पर एक बूढ़े कोरियाई बौद्ध भिक्षुक को देखा हो।

उसने जीप में बैठ कर आँखें बंद की और ध्यान लगा कर अपनी अन्वेषण-शक्ति को भी आसपास घुमाया, लेकिन बाबा ने अपनी शक्ति-लहर को पूरा ढका हुआ था, वह उन्हें नहीं खोज पाया। चारपाई पर लेटे हुए बाबा वहीं से उन सब को ध्यान से देख रहे थे। ताकानोरी उनमें अकेला जापानी था, उसे देखते ही वह पहचान गये कि वही उनका सरदार है।

बाबा जब छोटे थे तब कोरिया में उनके गुरु जी ने उन्हें अपनी गुप्त-शक्ति पर नियंत्रण करना और उनकी शक्ति-लहरों को छिपाना सिखाया था।

उनके गुरु जी कहते थे, “हर मानव शरीर में विद्युत और चुम्बकीय शक्तियाँ होती हैं, इन शक्तियों से मस्तिष्क सोचता है और नसों का तंत्र-जाल काम करता है। गुप्त-शक्तिवान लोगों में यह विद्युत और चुम्बकीय शक्ति अधिक तीव्र होती है, इसलिए अन्वेषण-किरण से उनकी शक्ति-लहरों को खोज सकते हैं। लेकिन अन्वेषण-किरण की शक्ति थोड़ी कठिन होती है, इसका सही उपयोग करने के लिए बहुत अभ्यास की आवश्यकता होती है। उसका ठीक से उपयोग नहीं करो तो जिसके मस्तिष्क को वह किरण छूती है, उसे पीड़ा होती है और वह तुरंत जान जाता है कि कोई उसे खोज रहा है।"

इसलिए बाबा समझ गये थे कि उस जापानी को अपनी अन्वेषण-किरण का ठीक से उपयोग करना नहीं आता। लेकिन वह नहीं जानते थे कि उस जापानी की अन्य कौन सी गुप्त शक्तियाँ हैं?

लोगों से पूछते-पूछते, मटरू कपड़े प्रैस करने वाली महिला के पास आया और उससे भी भिक्षुक बाबा के बारे में पूछा। वह बोली, “कोरिया का बौद्ध भिक्षुक? ऐसे किसी आदमी को मैंने नहीं देखा। मैं सुबह से यहाँ हूँ, ऐसा कोई विदेशी आदमी यहाँ से नहीं गुज़रा।"

मटरू ने पीछे चारपाई पर लेटे बाबा को देखा तो उनकी ओर जाने लगा, तब उस महिला ने उसे रोका, बोली, “उनकी तबियत ठीक नहीं है, बेचारे सो रहे हैं, उन्हें मत जगाओ, उन्होंने भी किसी को नहीं देखा।"

बटेर, लक्की और मटरू ने आसपास, आगे-पीछे, हर ओर चक्कर लगाये लेकिन उन्हें बाबा का कुछ पता नहीं चला। ओरी को समझ नहीं आया कि जिसकी शक्ति-लहर उसने महसूस की थी, वह उसे कैसे खोजे। शायद जून मिन उसकी अन्वेषण किरण को महसूस करते ही वहाँ से भाग कर कहीं पर छिप गया है? लेकिन वह अपनी शक्ति-लहर को कब तक छिपायेगा, शक्ति-लहर को छिपाना बहुत मेहनत का काम है, और वह बूढ़ा है। आखिर में तो उसे बाहर निकलना ही पड़ेगा, वह एक बार उसे मिला है, वह उसे दोबारा भी खोज निकालेगा।

यह सोच कर उसने बटेर, लक्की और मटरू को जीप में बिठाया और वह लोग अपने घर वापस लौट गये।

घर जा कर ओरी ने सोमचाई से दोबारा बात की, बोला, “वह भिक्षुक आज सुबह डकरोंग पोस्ट आफिस वाली गली में आया था। शायद वह भाँप गया कि मैं उसके पीछे हूँ, इसलिए वह वहाँ से भाग गया। तुम उस जगह के आसपास के सभी वीडियो-कैमरे खोजो, और उनकी जाँच करो। अगर वहाँ कोई वीडियो-कैमरे नहीं हों, तो सैटेलाइटों से जाँच करो, उस समय की तस्वीरें किसी न किसी सैटेलाइट में अवश्य मिलेंगी। किसी भी हालत में हमें पता लगाना है कि वह कैसा दिखता है, यहाँ पर किससे मिलने आया था और कहाँ गया? सुबह आठ बजे वह उस गली में था, तुम्हें उसे खोजना है।"

तीन घंटे की मेहनत के बाद सोमचाई ने बाबा का पता लगा लिया।

उसने ओरी को अपने लैपटॉप पर दिखाया, बोला, “यह वीडियो देखो, उस गली के पास की एक दुकान के वैबकैम से लिया है। आज सुबह साढ़े सात बजे के करीब, वहाँ पर एक आटो शिव-मन्दिर की ओर से आया और वह डकरोंग गली के पास रुका था। उसमें से यह आदमी उतर कर, उस गली में गया था। इस वीडियो में उसका चेहरा ठीक से नहीं दिखता, उसने सिर और मुँह पर गमछा लपेटा है, लेकिन चाल-ढाल से वह आदमी बूढ़ा लगता है। इसका मतलब है कि उसने बौद्ध भिक्षुक के वस्त्र नहीं पहने थे।"

फ़िर उसने एक दूसरी फाईल खोली, बोला, “यहाँ देखिये, इसमें मैंने उसी समय की सैटेलाइट-फीड से मैंने डकरोंग गली की तस्वीरें ली हैं। पहले वह आदमी गली में आ कर, इस दुकान के साथ वाले दरवाज़े से भीतर गया और आधे घंटे बाद वहाँ से दो लोग बाहर आते हैं। एक तो वही सुबह वाला आदमी है, दूसरा आदमी भी बूढ़ा लगता है। वह दोनों आदमी, दुकान के सामने थोड़ी देर तक बातें करते हैं। फ़िर दूसरा वाला आदमी उसी दरवाज़े में वापस लौट जाता है और पहले वाला आदमी, गली में थोड़ा सा आगे जा कर, एक औरत के पास चारपाई पर लेट जाता है। इस अगली तस्वीर में यह देखिये, आप की जीप उस गली में घुसती है, आप और तीनों आदमी नीचे उतरते हैं। यहाँ देखिये, इसमें मटरू उस चारपाई पर लेटे हुए आदमी के पास भी गया था लेकिन उससे बात नहीं की थी। जब आप लोग वहाँ से जीप में बैठ कर चले गये, तब वह बूढ़ा चारपाई से उठ कर, गली में आगे जा कर, उधर पेड़ों के नीचे चला गया। लेकिन उसके बाद वह कहाँ गया, यह मुझे दिखायी नहीं दिया। आप वहाँ जा कर पता कीजिये, उस औरत से पूछिये, और उन पेड़ों में देखिये, शायद उसके सुराग मिल जायेंगे।"

ताकानोरी ने वीडियो और तस्वीरों को ध्यान से देखा, बोला, “इसका मतलब है कि आज सुबह जब मैं वहाँ गया था, जून मिन उस गली में ही था, वह चारपाई से लेट कर मुझे देख रहा था, और मटरू उसके पास भी गया लेकिन उसे पहचान नहीं पाया।”

उसने तुरंत बटेर, लक्की और मटरू को बुलाया, उन्हें पूरी बात समझायी और डकरोंग गली में पूछताछ करने वापस भेजा।

उन्होंने लौट कर बताया कि उस दुकान पर और उसके ऊपर वाले घर के दरवाज़े पर ताला लगा है। उन्होंने पड़ोसियों से पूछा तो पता चला कि वह पूरा परिवार आज सुबह ही किसी काम से एक महीने के लिए दिल्ली गया है।

उन्होंने प्रैस करने वाली औरत से भी पूछा तो पता चला कि वह चारपाई वाले आदमी को नहीं जानती थी, वह कोई गरीब बूढ़ा था जिसकी तबियत ठीक नहीं थी, वहाँ पर कुछ देर तक आराम करने के लिए लेटा था, और फ़िर वह चुटियागाँव की ओर चला गया था।

पेड़ों के बीच में उन्हें तह किये हुए कपड़े और कँबल मिले लेकिन किसी ने उस बूढ़े को वहाँ से जाते हुए नहीं देखा था। ओरी को उन कपड़ों में भी शक्ति की हलकी सी प्रतिध्वनि महसूस हुई लेकिन यह नहीं समझ पाया कि उनसे वह जून मिन को कैसे खोज सकता है।

ओरी देर तक सोचता रहा कि क्या करे। वह इतना समझ गया है कि उस बूढ़े भिक्षुक में अपनी शक्ति-लहर को छिपाने की क्षमता तो है ही, वह बहुत चालाक भी है, उसे पकड़ना आसान नहीं होगा।

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अगला अध्याय सोमवार 15 जून को पढ़ सकते हैं। 

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