अब तक की कहानी: प्रतिमा की खोज में त्री और ओरी लखमीपारा गाँव के पास शंखासुर की पहाड़ी देखने जा रहे थे, तब रास्ते में उनका सामना कुछ गैंडों के सींग चुराने वाले तस्करों से हो गया, जो एक फॉरैस्ट गार्ड को मार रहे थे। ओर उस गार्ड को बचाने के लिए गया और तस्करों से लड़ने लगा। लड़ाई में एक तस्कर की मृत्यु हो गयी, त्री और ओरी वहाँ से भागे। गार्गी ब्रह्मपुत्र नदी पर एक मोटर-बोट से त्री से सम्पर्क बनाये हुए थी, उसने उन्हें नदी किनारे बुलाया। आगे पढ़िये ...
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अध्याय 27
बिश्वनाथ चरियाली, असम, 7 - 8 मार्च 2026
अँधेरा हो गया था। उनकी मोटरबोट बिश्वानाथ चरियाली के पूर्व में नदी किनारे खड़ी थी। वसंत की तबियत ठीक नहीं थी और गार्गी थकी हुई थी, वह दोनों सोने चले गये थे। बाकी के लोग नाव के डैक पर बैठे बातें कर रहे थे।
त्री बोला, “अब हम लोग गुरु जी की प्रतिमा को कैसे खोजेंगे? काज़ीरंगा के गार्ड पर हमला हुआ है और एक तस्कर की मृत्यु हुई है। पुलिस जाँच कर रही होगी कि क्या हुआ और किसने किया, इसलिए अगर हम वहाँ लौटें तो पुलिस हमें पकड़ सकती है।"
रंगनाथ बोला, “पहले आप लोग लखमीपारा के पश्चिम में ठहरे थे, इस बार हम वहाँ से कुछ देर, पूर्व की ओर कोई होटल खोज सकते हैं, हालाँकि वहाँ से रास्ता कुछ लम्बा पड़ेगा। दूसरी मुश्किल है कि पूरे क्षेत्र में यह खबर फैल चुकी होगी, इसलिए लोग आप को पहचान कर तुरंत पुलिस को खबर कर सकते हैं।"
आभा बोली, “जब वह गार्ड होश में आयेगा तो वह बतायेगा कि उस पर तस्करों ने हमला किया था, पर मेरे विचार में वह तस्कर पुलिस को रिपोर्ट लिखवाने नहीं जायेंगे कि उन पर किसने हमला किया था। इसलिए हो सकता है कि पुलिस तुम्हारी नहीं, केवल तस्करों की खोज कर रही हो। किसी ने तुम दोनों को वहाँ नहीं देखा, अधिक से अधिक, पंडित जी पुलिस को बता सकते हैं कि तुम दोनों उस दिन शंखासुर पहाड़ी की ओर गये थे। इसलिए पुलिस तुमसे पूछ सकती है कि तुमने वहाँ क्या देखा? मेरे विचार में एक-दो दिन में यह बात ठंडी हो जायेगी, फिर तुम लोग अपनी खोज पर जा सकते हो।"
ताकानोरी कुछ नहीं बोला लेकिन उसके चेहरे से स्पष्ट था कि वह गुस्से में है।
त्री बोला , “लेकिन वह तस्कर इसी क्षेत्र से हैं, उन्होंने हमें देखा है, वह हमें खोज रहे होंगे। अगर उनके हाथ लग गये तो हमसे कुछ पूछेंगे नहीं, सीधा गोली मार देंगे।"
आभा बोली, “तुम ठीक कहते हो, इस समय कुछ निर्णय नहीं लेना चाहिये। कल सुबह अखबार में देखेंगे कि क्या लिखा है और अगर ज़रूरत पड़ी, तो मैं, रंगनाथ और गार्गी, हम कोहोरा में पता करने जा सकते हैं। वहाँ के टैक्सी ड्राइवर, पर्यटकों को काज़ीरंगा की सफारी के लिए ले कर जाते हैं, उनसे भीतर की खबर मिल जायेगी। उसके बाद ही निर्णय लेंगे कि क्या करें।"
ओरी ने मोटरबोट वाले को बिश्वानाथ चरियाली में बियर खरीदने भेज दिया और रात को देर तक डैक पर बैठ कर बियर पीता रहा।
बाकी सब लोग सोने गये। नाव में केवल एक कमरा था, उसमें मोटी चद्दरों से बने हैम्मोक साथ-साथ लटक रहे थे, सभी उन पर सोये।
अगले दिन सुबह, त्री और रंगनाथ शहर से अखबारें और नाश्ता खरीदने गये। अखबार से पता चला कि गार्ड बच गया है और उसकी अंतिम स्मृति थी कि एक तस्कर उसे पेड़ से बाँधने के लिए घसीट रहा था। काज़ीरंगा के एक अधिकारी ने उस अज्ञात व्यक्ति को धन्यवाद दिया जिसने रुमाल बाँध कर गार्ड का खून बहना रोका था और उसकी जान बचायी थी। पुलिस के अनुसार गार्ड को बचाने वाला व्यक्ति, शायद तस्करों का कोई प्रतिद्वंदी तस्कर ही था।
ओरी बोला, “अगर उन्हें हमारे बारे में कुछ नहीं मालूम, तो हम आज वहाँ पर लौट सकते हैं।"
वसंत उनकी बात सुन रहा था, वह बोला, “दादा, अगर आप को काज़ीरंगा के आसपास कुछ खोजना है तो हम पेड़ों की सहायता से, यहीं से उस जगह को खोज सकते हैं।"
त्री बोला, “मैंने भी इस बारे में सोचा था लेकिन ताकानोरी सान उस जगह को स्वयं देखना चाहते हैं।"
वसंत बोला, “इधर-उधर भटकने से अच्छा है कि पहले मैं उस जगह को खोज लूँ, फिर आप दोनों सीधा वहाँ जा सकते हो।"
यह बात सुन कर ओरी का गुस्सा कुछ कम हुआ।
वसंत बोला, “आप मुझे बताओ कि हम किस दिशा में, क्या खोज रहे हैं?”
त्री ने टैबलेट बाहर निकाली और उस पर लखमीपारा गाँव को खोजा, उसे दिखाते हुए बोला, “यहाँ से पूर्व दिशा में जा कर एक दलदल-झील है, वहाँ के लोग उसे डाफलोंग बील कहते हैं। उसके पश्चिमी किनारे पर जो पहाड़ी है, वह शंखासुर है।"
वसंत ने आँखें बंद कर लीं और उस दिशा में ध्यान लगाया।
ओरी ने फुसफुसा कर आभा से पूछा, “क्या पेड़ भी बोलते हैं? उन्हें डाफलोंग दलदल-झील का नाम बताओ तो वह बता देंगे कि वह किधर है?”
आभा मुस्करायी, “वसंत बता रहा था कि उसे कुछ कहना नहीं पड़ता, वह केवल अपनी संचेतना को पेड़ों की संचेतना से जोड़ देता है, पेड़ अपने आप जान लेते हैं कि वह क्या पूछ रहा है।"
गार्गी ने त्री से पूछा, “दादा, यह दलदल-झील क्या होता है?”
“जब वहाँ बारिश नहीं होती और पानी कम हो जाता है तो वहाँ दलदल रह जाती है, पर बारिश के मौसम में वह झील बन जाती है।"
वसंत ने आँखें खोलीं, बोला, “वह पहाड़ी मिल गयी, उस पर पेड़ कम हैं, अधिकतर झाड़ियाँ हैं। इस समय पहाड़ी के साथ वाली दलदल-झील में पानी कम है, और वहाँ दलदल में एक हिरण फँसा हुआ है, वह अधिक समय तक जीवित नहीं रह पायेगा।"
त्री ने आभा से पूछा, "कविता की आगे की पंक्तियाँ क्या हैं?” तो उसने वह पंक्तियाँ सुनायीं -
“कंदरा में गूँजती चौदह ध्वनियाँ पिनाक की,
लौटी सति पर्वतराज पिता के घर, त्रिनेत्र कहाँ है?”
वह बोला, “यानि गुफा में डमरू की चौदह ध्वनियाँ गूँज रही हैं, इसका मतलब है कि वहाँ कोई लम्बी गुफा है जिसमें चौदह कक्ष हैं, या फिर चौदह गुफाएँ हैं जो शायद डमरू की आकृति में बनी हैं। शंखासुर पहाड़ी किस दिशा में है? उससे हमें उन गुफाओं की दिशा दिखनी चाहिये।"
वसंत बोला, “उस पहाड़ी के पूर्व में तो दलदल है और पश्चिम में लखमीपारा, मैं उसके उत्तर और दक्षिण में खोज कर सकता हूँ कि वहाँ कोई गुफाएँ हैं या नहीं।" यह कह कर वह फिर से ध्यान में लीन हो गया। कुछ देर के बाद उसने आँखें खोलीं, बोला, “वहाँ आसपास कोई गुफा नहीं मिली। उस पहाड़ी के आसपास बहुत देखा लेकिन वहाँ पर दूर-दूर तक कोई गुफा नहीं है।"
ओरी को विश्वास नहीं हुआ, बोला, “शायद यह बच्चा उस क्षेत्र को ठीक से देख नहीं पाया? हमें खुद वहाँ जा कर उसकी जाँच करनी चाहिये।"
वसंत कुछ नहीं बोला, लेकिन त्री ने कहा, “यह खोज वसंत ने नहीं की है, यह इस क्षेत्र के हज़ारों पेड़ों और पौधों का काम है। ऐसा हो ही नहीं सकता कि यहाँ कोई गुफा हो और उसके आसपास के पेड़-पौधों को उसके बारे में पता नहीं हो। अगर वसंत कह रहा है कि वहाँ कोई गुफा नहीं है तो हमारा वहाँ जाना बेकार है।"
ओरी बोला, “लेकिन अगर गुफा वहाँ नहीं है, तो हम क्या करेंगे?”
“हमें फिर से कविता के अर्थ को समझने की कोशिश करनी चाहिये, शायद उनकी कोई बात हमने ठीक से नहीं समझी। आभा, गुरु जी का कागज़ निकालो, हम उस पर दोबारा विचार करेंगे।"
ओरी बोला, “मुझे लगता है कि तुम लोग कोई ड्रामा कर रहे हो। तुम्हारे गुरु ने तुम्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया है लेकिन मूर्ति के बारे में स्पष्ट लिखने के बजाय एक पहेली बना दी है, जो तुम्हारी समझ में नहीं आ रही, यह क्या बात हुई?”
“गुरु जी ज्ञानी हैं, वह जैसा उचित समझते हैं, वैसा करते हैं", रंगनाथ बोला तो त्री ने इशारा करके उसे चुप रहने के लिए कहा और ओरी से बोला, “तुम डरते हो कि अगर हमें वह मूर्ति नहीं मिलेगी तो तुम क्या करोगे। तुम्हारी यह चिंता व्यर्थ है, हम उसे अवश्य खोज लेंगे, हमें केवल थोड़ा सा समय चाहिये।"
लेकिन ताकानोरी का गुस्सा शाँत नहीं हुआ, बोला, “मेरे पास अधिक समय नहीं है।"
आभा उठी और पास जा कर उसके कँधे पर हाथ रखा तो वह चुप हो गया, वह बोली, “कल शाम को तुमने शायद कुछ अधिक बियर पी ली, इसलिए आज तुम चिड़चिड़े हो रहे हो। मैं तुम्हारे लिए दालचीनी और सौंफ वाली चाय बनाती हूँ, उससे तुम्हारा मन शाँत होगा और तुम्हें फायदा होगा।"
तभी गार्गी बोली, “मेरे विचार में हम लोग गलत जगह पर मूर्ति खोज रहे हैं।"
सब ने मुड़ कर उसकी ओर देखा। उसके हाथ में ओरी की टैबलेट थी और वह उस पर उस क्षेत्र के नक्शे को देख रही थी। बोली, “यहाँ देखो, इस द्वीप का क्या नाम है?”
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अगला अध्याय बृहस्पतिवार 3 सितम्बर को पढ़ सकते हैं
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"जो न कह सके" के आलेख पढ़ने एवं टिप्पणी के लिए डॉ. सुनील दीपक की ओर से आप का हार्दिक धन्यवाद.